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अध्ययन ने जीवन के रसायनों के भरोसेमंद स्रोत के रूप में धूमकेतुओं पर सवाल उठाया

प्रकाशित 29 अक्टूबर 2026 9 दृश्य

कैम्ब्रिज के नेतृत्व वाले एक अध्ययन ने इस विचार पर सवाल उठाया है कि धूमकेतु युवा पृथ्वी को जीवन के रासायनिक तत्व नियमित रूप से उपलब्ध कराते थे। साइंटिफिक रिपोर्ट्स में 28 अक्टूबर को प्रकाशित और 29 अक्टूबर को नई खबरों में आए शोध के अनुसार हाइड्रोजन सायनाइड की उपयोगी सांद्रता पहुंचना अत्यंत दुर्लभ रहा होगा। लेखक किसी एक सफल टक्कर की संभावना खारिज नहीं करते।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अनुसार रिचर्ड एन्सलो और सहयोगियों ने धूमकेतुओं की आबादी, वायुमंडल में प्रवेश और टक्करों के मॉडल जोड़े। धूमकेतुओं में कार्बन और नाइट्रोजन वाले अणु होते हैं, इसलिए वे रसायनों के संभावित स्रोत हैं। टीम ने हाइड्रोजन सायनाइड यानी एचसीएन पर ध्यान दिया। धूमकेतुओं में मिलने वाला यह यौगिक जीवन के आणविक घटक बनाने वाली प्रतिक्रियाओं में मदद कर सकता है।

शोधपत्र में पृथ्वी पर धूमकेतुओं की बमबारी के इतिहास के एक लाख सिमुलेशन हैं। इनमें 54 प्रतिशत में कोई टक्कर खुली भूमि पर एचसीएन की जरूरी सांद्रता नहीं पहुंचा सकी। अनुकूल धारणाओं के बावजूद सफल टक्करों की माध्यिका शून्य थी। तेज गति अणुओं को नष्ट कर सकती है और वायुमंडल से गुजरते समय कमजोर धूमकेतु टूट जाते हैं। बची सामग्री भी इतनी पतली पड़ सकती है कि जांची गई रासायनिक प्रक्रिया संभव न रहे।

लेखकों ने ग्रहों की तुलना में मंगल को अधिक अनुकूल पाया, क्योंकि वहां टक्कर की गति कम और वायुमंडल पतला है। यह तुलना पर्यावरण की सरल धारणाओं पर आधारित है और वहां जीवन पैदा होने का प्रमाण नहीं देती। पृथ्वी के पुराने वायुमंडल और खुली भूमि को लेकर अनिश्चितताएं अहम हैं। अध्ययन एक खास रासायनिक मार्ग को परखता है, जीवन की उत्पत्ति का प्रत्यक्ष अवलोकन नहीं करता।

कैम्ब्रिज के अनुसार विकल्पों में क्षुद्रग्रहों की टक्करों से जुड़ी रासायनिक क्रियाएं या पृथ्वी की अपनी प्रक्रियाएं शामिल हैं। लेखक कहते हैं कि बारंबार गुरुत्वीय मुठभेड़ों से धूमकेतुओं को धीमा करने वाली ग्रह प्रणालियां रहने योग्य दुनिया की भविष्य की खोज को दिशा दे सकती हैं। नतीजे धूमकेतुओं से सामग्री मिलने की जरूरी परिस्थितियां सीमित करते हैं, लेकिन जीवन कैसे शुरू हुआ, यह व्यापक प्रश्न खुला है।

स्रोत: University of Cambridge (https://www.cam.ac.uk/research/news/comets-didnt-seed-life-on-earth-after-all-new-study-suggests); Scientific Reports (https://doi.org/10.1038/s41598-026-74214-y); ingenieur.de, October 29 coverage (https://www.ingenieur.de/100-jahre-glaubten-forscher-an-kometen-jetzt-sprechen-die-zahlen-dagegen-1f7b5c1e-0767-4694-ab34-92555fdd2b89/)

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