स्विट्जरलैंड के हिमनदों ने 2025-26 के निगरानी वर्ष में अपनी बर्फ की मात्रा का 5.5 प्रतिशत खो दिया। यह माप शुरू होने के बाद प्रतिशत के हिसाब से दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है। स्विस हिमनद निगरानी नेटवर्क ग्लामोस और स्विस प्राकृतिक विज्ञान अकादमी ने एक अक्टूबर को यह आंकड़ा जारी किया। शोधकर्ताओं ने नुकसान का कारण कम बर्फबारी वाली सर्दी और उसके बाद आल्प्स पर्वतों में असामान्य गर्म तथा शुष्क मौसम बताया।
नए आंकड़ों के अनुसार, 2021 से स्विस हिमनदों की लगभग पांचवें हिस्से की बर्फ गायब हो चुकी है। 2026 की गिरावट 2022 के रिकॉर्ड नुकसान से कम रही, लेकिन निगरानी संस्थाओं ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पिघलने की गति पहले दर्ज किसी भी पांच वर्षीय अवधि से दोगुने से भी अधिक थी। यह हिसाब 30 सितंबर को समाप्त हुए निगरानी वर्ष का है, कैलेंडर वर्ष का नहीं।
ज्यूरिख के स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सारांश के मुताबिक, 2025-26 की सर्दी राष्ट्रीय माप शुरू होने के बाद सबसे कम हिमपात वाली दस सर्दियों में शामिल थी। मई से सितंबर तक गर्मी और सूखे ने हिमनदों की बर्फ को खुला छोड़ दिया। जमाव की ऊंचाई 76 दिनों तक 4,000 मीटर से ऊपर रही, जो सामान्य संख्या से दोगुने से अधिक है। सितंबर तक 3,500 मीटर पर भी हिम आवरण नहीं बचा था। सर्दियों की बर्फ पुरानी बर्फ को गर्मी से बचाती है और नया हिमनद बनाने में मदद करती है।
ग्लामोस ने अध्ययन किए गए हिमनदों की मोटाई में औसतन 2.5 से चार मीटर की कमी दर्ज की, जबकि कुछ निचले सिरों पर दस मीटर तक बर्फ कम हुई। ज्यूरिख संस्थान के विवरण के अनुसार, रोन, आलेच और क्लारिडेन हिमनदों में अब तक दर्ज सबसे अधिक पिघलाव हुआ। बेला टोला और ग्रिसफिर्न जैसे छोटे हिमनद पूरी तरह समाप्त हो गए।
शोधकर्ताओं के अनुमान के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच हिमनदों से लगभग 2.2 लाख करोड़ लीटर पानी निकला। यह स्विस घरों के सालाना पेयजल इस्तेमाल के चार गुने से अधिक है। यह पानी सूखी गर्मियों में कमी घटा सकता है, लेकिन ग्लामोस के निदेशक मथियास हुस ने रॉयटर्स से कहा कि हिमनद सिकुड़ने पर यह लाभ भी घटता जाएगा। स्विस हिमनद यूरोप की बड़ी नदी प्रणालियों को भी पानी देते हैं, इसलिए असर देश की सीमाओं से आगे जाता है।
निगरानी नेटवर्क ने कहा कि लगातार बढ़ता तापमान आल्प्स के हिमनदों के दीर्घकालीन अस्तित्व के लिए खतरा है। नए माप आगे की बर्फ हानि, पानी की उपलब्धता और पर्वतीय भूभाग में बदलाव का आकलन करने का आधार देंगे। शोधकर्ता बची बर्फ का सर्वेक्षण जारी रखेंगे; अगली सर्दी की बर्फबारी और उसके बाद की गर्मी तय करेगी कि हिमनद और कितने पीछे हटते हैं।
टिप्पणियाँ