अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार 16 अगस्त को पेंटागन को दक्षिण कोरिया के साथ वार्षिक सैन्य अभ्यास में बड़ी कटौती करने का आदेश दिया। यह आदेश उल्ची फ्रीडम शील्ड प्रशिक्षण शुरू होने से कुछ घंटे पहले आया। एसोसिएटेड प्रेस और एक्सियोस के अनुसार, ट्रंप ने अभ्यास को महंगा और उत्तर कोरिया के प्रति शत्रुतापूर्ण बताया तथा अपने फैसले को उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों से जोड़ा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण से जुड़े अमेरिकी प्रयासों में शामिल होने का हालिया अनुरोध ठुकरा दिया था। यह अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिया गया कारण था; खबरों में न तो मांगी गई सहायता का दायरा बताया गया और न ही बातचीत पर सियोल का पक्ष सामने आया। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अभ्यास सोमवार को तय समय पर शुरू हुआ और 27 अगस्त तक चलेगा।
उल्ची फ्रीडम शील्ड उन दो प्रमुख संयुक्त अभ्यासों में से एक है जिन्हें वॉशिंगटन और सियोल हर साल आयोजित करते हैं। 11 दिन के कार्यक्रम में लगभग 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिकों को शामिल करने और उत्तर कोरियाई खतरों के विरुद्ध तैयारी मजबूत करने की योजना थी। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा में गठबंधन की केंद्रीय भूमिका की पुष्टि बताया था।
नियोजित गतिविधियों में कंप्यूटर आधारित कमान प्रशिक्षण और मैदानी अभियान शामिल थे। इनमें सटीक लक्ष्य और सैन्य चाल के परीक्षण के लिए वास्तविक गोलीबारी, जल क्षेत्र को पार करना और पहले से रखे सैन्य उपकरणों का वितरण शामिल था। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हुआ कि किन हिस्सों में कटौती होगी या आदेश का भाग लेने वाले अमेरिकी बलों पर क्या असर पड़ेगा। इसलिए अंतिम समय के बदलाव के बाद भी परिचालन विवरण तय होना बाकी है।
यह फैसला कोरियाई प्रायद्वीप पर नए तनाव के बाद आया। उत्तर कोरिया ने हाल में संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत प्रतिबंधित बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण फिर शुरू किए और अभ्यास पर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी, जिसे उसने युद्ध की तैयारी बताया। वॉशिंगटन और सियोल अभ्यास को रक्षात्मक कहते हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क केली ने कटौती को अदूरदर्शी बताया, जबकि ट्रंप ने कहा कि उनके राष्ट्रपति रहते प्योंगयांग ने सम्मानजनक व्यवहार किया।
ट्रंप ने 2018 में किम के साथ शिखर वार्ता के बाद भी बड़े अभ्यास सीमित किए थे, लेकिन दोनों की परमाणु कूटनीति 2019 में टूट गई। उन्होंने बाद में फिर वार्ता में रुचि दिखाई, जबकि उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं का विस्तार जारी रखा। अब अभ्यास के अंतिम आकार, सियोल की प्रतिक्रिया और इस बात पर ध्यान रहेगा कि यह कदम कूटनीति का रास्ता खोलता है या सहयोगी देशों की सैन्य तैयारी पर नए सवाल उठाता है।
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