अमेरिका और चीन ने वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत के बाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी घटनाओं की सूचना देने और उन पर चर्चा करने के लिए द्विपक्षीय संपर्क चैनल बनाने पर सहमति जताई है। व्हाइट हाउस की 25 सितंबर की तथ्य पत्रिका के अनुसार दोनों सरकारों ने इस तकनीक के जोखिमों और लाभों पर संवाद भी शुरू किया है और नवंबर तक अगली बातचीत होगी। यह व्यवस्था किसी गंभीर घटना की स्थिति में दोनों प्रतिस्पर्धी देशों को सीधे संपर्क का एक तय रास्ता देती है।
यह घोषणा शी की तीन दिन की राजकीय यात्रा के बाद आई, जो शुक्रवार को समाप्त हुई। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकने वाली एआई घटनाओं की सूचना देने का अमेरिकी प्रस्ताव बताया था। नया चैनल उस प्रस्ताव को द्विपक्षीय प्रतिबद्धता बनाता है। हालांकि दोनों सरकारों ने यह सार्वजनिक नहीं किया है कि चेतावनी कैसे भेजी जाएगी या किन घटनाओं पर ऐसा करना आवश्यक होगा।
व्हाइट हाउस इन वार्ताओं को अमेरिका-चीन सुपर इंटेलिजेंस संवाद कहता है और उभरती तकनीक के लिए यही शब्द इस्तेमाल करता है। उसके दस्तावेज के अनुसार अगला संवाद नवंबर 2026 तक होगा। दस्तावेज में घटनाओं के लिए द्विपक्षीय चैनल का अलग से उल्लेख है। ये सूचना साझा करने की प्रतिबद्धताएं हैं; किसी साझा तकनीकी मानक या एआई विकास को सीमित करने के समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
एसोसिएटेड प्रेस की शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार शिखर बैठक के चीनी विवरण में भी एआई से जुड़ी घटनाओं के लिए तंत्र और नवंबर में विशेष संवाद का उल्लेख है। बीजिंग ने यह भी कहा कि दोनों देश सैन्य संकट के दौरान संपर्क मजबूत करेंगे। नेताओं की बैठक के बाद घोषित कई कार्यकारी कदमों में एआई व्यवस्था भी शामिल है, जबकि तकनीक और व्यापार से जुड़े बड़े मतभेद अभी बने हुए हैं।
यदि किसी एआई प्रणाली से देशों की सीमाओं के पार अप्रत्याशित समस्या पैदा होती है, तो यह चैनल अधिकारियों को घटना स्पष्ट करने में मदद दे सकता है। लेकिन उसकी प्रभावशीलता उन नियमों और नियमित उपयोग पर निर्भर करेगी जिनका विवरण अभी सार्वजनिक नहीं है। एपी के अनुसार ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका अपनी एआई क्षमता बढ़ाता रहेगा। इसलिए घोषणा का अर्थ तकनीकी प्रतिस्पर्धा में विराम नहीं है।
नवंबर तक प्रस्तावित अगला एआई संवाद इस व्यवस्था की निकट अवधि की पहली परीक्षा होगा। अधिकारियों ने चैनल चलाने वाली संस्थाओं, जवाब देने की समय सीमा या उसके दायरे की जानकारी नहीं दी है। यही विवरण तय करेंगे कि घटना के समय सूचनाएं कितनी जल्दी साझा होंगी और नया तंत्र व्यावहारिक सुरक्षा उपाय बन पाएगा या नहीं।
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