अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर को ट्रंप प्रशासन को 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले डाक मतपत्रों पर नई पाबंदियां लागू करने की अनुमति नहीं दी। वाशिंगटन स्थित अदालत ने निचली अदालत द्वारा जारी निषेधाज्ञा, यानी नियम लागू करने पर न्यायिक रोक, बरकरार रखी। उसके आदेश, रॉयटर्स और एपी के अनुसार, राज्य मतपत्र भेजने की मौजूदा प्रक्रिया जारी रख सकते हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, न्याय विभाग ने बोस्टन की न्यायाधीश इंदिरा तलवानी की रोक निलंबित करने की मांग की थी। राज्य और मतदान अधिकार समूह नियम को चुनौती दे रहे हैं। डाक सेवा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मार्च के कार्यकारी आदेश के बाद यह उपाय अपनाया। नवंबर में होने वाले इन चुनावों के परिणाम तय करेंगे कि अमेरिकी कांग्रेस पर किस राजनीतिक दल का नियंत्रण होगा।
रॉयटर्स के मुताबिक, नियम राज्यों से डाक पोर्टल पर मतपत्र पाने वालों की सूची और विशिष्ट बारकोड वाले स्वीकृत लिफाफे मांगता है। एजेंसी नियम न मानने वाली डाक या सूची से बाहर मतदाताओं के मतपत्र रोक सकती थी। प्रशासन ने कहा कि जांच से धोखाधड़ी रुकेगी; रॉयटर्स ने ऐसी धोखाधड़ी के साक्ष्य दुर्लभ बताए।
संक्षिप्त, अहस्ताक्षरित आदेश में अदालत ने कहा कि प्रारंभिक रोक के विरुद्ध सरकार की चुनौती सफल होने की संभावना कम है। संभावित हानि का संतुलन भी तत्काल राहत के पक्ष में नहीं है। न्यायाधीश ब्रेट कैवनॉ सहमत थे: नियम डाक सेवा के अधिकार में हो सकता है, लेकिन चुनाव अधिकारियों के पास 2026 में उचित अमल का पर्याप्त समय नहीं है।
न्यायाधीश सैमुअल अलिटो और क्लेरेंस थॉमस असहमत थे। अलिटो के अनुसार, सरकार राहत की शर्तें पूरी करती है और डाक सेवा के नियामक अधिकार व्यापक हैं। अमेरिकी समाचार नेटवर्क सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दोनों दलों के चुनाव प्रशासकों ने अंतिम समय के बदलावों पर चेताया, जिनमें खरीद और डाक भेजना शुरू होने के बाद लिफाफों की नई शर्तें शामिल हैं।
एपी के अनुसार, मतदान शुरू हो जाने के बीच फैसले से स्थापित डाक मतदान प्रक्रिया जारी रहेगी। रॉयटर्स ने 13 सितंबर को न्यायाधीश कार्ल निकोल्स की अलग रोक की भी खबर दी। डाक सेवा के नियम को लेकर राज्यों और समूहों की मूल कानूनी चुनौतियों पर सुनवाई की प्रक्रिया अभी जारी है: सोमवार को निषेधाज्ञा निलंबित करने का तत्काल अनुरोध खारिज हुआ। नवंबर की तैयारियों के दौरान पाबंदियां रुकी रहेंगी।
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