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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के डाक मतदान प्रतिबंधों का रास्ता खोला

प्रकाशित 25 अगस्त 2026 0 दृश्य

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले डाक से मतदान सीमित करने की योजना पर लगी एक न्यायिक बाधा हटा दी, लेकिन देशव्यापी स्तर पर लागू एक अलग निषेधाज्ञा बरकरार है। आपातकालीन निर्णय से प्रशासन को मार्च के कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों पर आगे बढ़ने की अनुमति मिलती है, जबकि मुकदमे जारी हैं। इससे राज्यों द्वारा सैन्यकर्मियों और विदेश में रहने वाले मतदाताओं को पहली मतपत्र सामग्री भेजने से कुछ दिन पहले अनिश्चितता पैदा हुई है।

छह के मुकाबले तीन न्यायाधीशों वाले रूढ़िवादी बहुमत ने यह तय नहीं किया कि आदेश संवैधानिक है या नहीं। अदालत ने कहा कि अधिकतर डेमोक्रेट नेतृत्व वाले 23 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया ने नीति को बहुत जल्दी चुनौती दी, क्योंकि संघीय एजेंसियों ने अभी उन्हें ठोस नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई नहीं की थी। न्यायाधीशों ने मैसाचुसेट्स की संघीय न्यायाधीश इंदिरा तलवानी की जून की निषेधाज्ञा रोक दी और कहा कि लागू होने से तत्काल क्षति होने पर राज्य फिर अदालत जा सकते हैं।

ट्रंप का आदेश गृह सुरक्षा विभाग को राज्यों के लिए नागरिकता सूचियां तैयार करने और न्याय विभाग को उन अधिकारियों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने को कहता है जो संघीय सरकार के अनुसार अपात्र लोगों को मतपत्र देते हैं। यह डाक सेवा को केवल स्वीकृत राज्य सूचियों में शामिल मतदाताओं के डाक मतपत्र पहुंचाने का निर्देश भी देता है। ट्रंप इन कदमों को चुनावी शुचिता की सुरक्षा बताते हैं, हालांकि गैर-नागरिक मतदान और डाक मतपत्र धोखाधड़ी दुर्लभ हैं।

डाक सेवा ने संबंधित नियमों को अंतिम रूप दिया है जिनके तहत राज्यों को डाक मतदाताओं की सूची देनी होगी और भेजे तथा लौटाए जाने वाले लिफाफों पर नए निशान और विशिष्ट बारकोड लगाने होंगे। मतदान अधिकार समूहों की याचिका पर तलवानी का 11 अगस्त का दूसरा आदेश इन बदलावों को 2026 के चुनाव के लिए पूरे देश में अभी भी रोकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रशासन ने सोमवार देर रात न्यायाधीश से इस शेष रोक को हटाने या स्थगित करने का अनुरोध किया।

चुनाव प्रशासकों के सामने बेहद कम समय है। नॉर्थ कैरोलाइना को 4 सितंबर को सैन्य और विदेशी मतदाताओं के लिए मतपत्र भेजने हैं और उसके तुरंत बाद अन्य राज्य भी ऐसा करेंगे, जबकि कई लिफाफे और प्रक्रियाएं पहले ही तैयार हैं। एपी द्वारा उद्धृत संघीय आंकड़ों के अनुसार 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 30 प्रतिशत मत डाक से पड़े थे। एरिजोना के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एड्रियन फोंटेस ने कहा कि वहां मतदाता अब भी डाक से मतदान कर सकते हैं और फिलहाल कोई प्रक्रिया नहीं बदली है।

विवाद अब निचली अदालतों में लौटेगा, जहां राज्य और मतदान अधिकार संगठन अंतिम डाक नियम के खिलाफ अपनी चुनौतियों को दोबारा दाखिल या संशोधित कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय प्रारंभिक है और उसने न तो कार्यकारी आदेश के कानूनी अधिकार को हल किया है, न उसके व्यावहारिक प्रभाव को। नवंबर से पहले कोई प्रतिबंध मतदाताओं तक पहुंचेगा या नहीं, यह बाकी मामलों में तेज फैसलों और संघीय एजेंसियों के वास्तविक कार्यान्वयन प्रयासों पर निर्भर करेगा।

स्रोत: U.S. Supreme Court, Reuters, Associated Press, Arizona Secretary of State

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