अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को इस पर दलीलें सुनीं कि कोलोराडो का बोल्डर राज्य कानून के तहत एक्सॉनमोबिल और सनकोर एनर्जी के खिलाफ जलवायु नुकसान का मुकदमा आगे बढ़ा सकता है या नहीं। रॉयटर्स के अनुसार, कंपनियों की अपील पर न्यायाधीशों ने दोनों पक्षों से सवाल किए। सुनवाई मुकदमा जारी रखने पर थी; इसमें न जिम्मेदारी तय करने का फैसला आया और न मुआवजा दिया गया।
बोल्डर शहर और काउंटी ने अप्रैल 2018 में मुकदमा दायर किया था। काउंटी के अनुसार, आरोप है कि कंपनियों ने अपने उत्पादों के खतरे छिपाते हुए जानबूझकर जलवायु परिवर्तन में योगदान दिया। कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में दावों को आगे बढ़ाने की अनुमति दी, क्योंकि उसके अनुसार संघीय कानून उन्हें नहीं रोकता। कंपनियां देश की सर्वोच्च अदालत में उस फैसले को चुनौती दे रही हैं।
कंपनियों ने अपने अदालती दस्तावेज में कहा है कि संविधान और स्वच्छ वायु कानून राज्यों तथा देशों की सीमाओं के पार होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से जुड़े नुकसान पर राज्य कानून के दावों को रोकते हैं। उनका कहना है कि स्थानीय जूरी को ऐसे दावे तय करने देने से परस्पर विरोधी राष्ट्रीय जलवायु नीतियां बन सकती हैं। रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने सुनवाई में कंपनियों का समर्थन किया।
बोल्डर अधिकारियों के अनुसार, समुदायों को जंगल की आग, बाढ़, भीषण गर्मी और सूखे से खर्च उठाना पड़ता है, जिसमें बुनियादी ढांचे का नुकसान भी शामिल है। सुनवाई के बाद काउंटी ने कहा कि उद्देश्य स्थानीय जलवायु लागत में योगदान पाना है, उत्सर्जन नियंत्रित करना या जीवाश्म ईंधन उत्पादन रोकना नहीं। खतरे छिपाने और नुकसान की जिम्मेदारी संबंधी आरोपों की अदालत में जांच बाकी है।
रॉयटर्स के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने पूछा कि अन्य सीमा-पार नुकसान के मुकदमे स्वीकार होने पर राज्य की ऐसी याचिकाएं क्यों रोकी जाएं। उन्होंने बोल्डर के वकील से यह भी पूछा कि देशभर की नगरपालिकाओं के समान मुकदमे करने पर व्यावहारिक परिणाम क्या होंगे। एपी के अनुसार, प्रमुख न्यायाधीश मुकदमों के संभावित विस्तार को लेकर चिंतित और संघीय तथा राज्य कानून के प्रश्नों पर विभाजित दिखे।
इसका असर कोलोराडो से आगे तक है। रॉयटर्स द्वारा उद्धृत कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, करीब 60 राज्य और स्थानीय सरकारों ने अरबों डॉलर मांगते हुए दर्जनों समान मुकदमे किए हैं। कंपनियों के पक्ष में फैसला कई मामलों को खारिज करा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक रिकॉर्ड 5 अक्टूबर की सुनवाई की पुष्टि करता है; पक्ष अब इस मुकदमे को आगे बढ़ाने पर फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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