नासा के जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन ने NGC 2392 यानी सिंह नीहारिका का नया अवरक्त दृश्य तैयार किया है। इसमें मरते हुए तारे के अवशेषों से आकार पाए धूल के सघन गुच्छे, आयनित गैस और एक-दूसरे के भीतर स्थित खोल दिखाई देते हैं। नासा ने यूरोपीय और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसियों तथा स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट के योगदान वाली यह जानकारी 10 अगस्त को जारी की।
यह ग्रहीय नीहारिका तब बनी जब कम द्रव्यमान वाले और ऑक्सीजन से समृद्ध तारे में उसे सहारा देने वाली नाभिकीय अभिक्रियाएं समाप्त हो गईं। अस्थिर तारा धड़कने लगा और कई हजार वर्षों तक अपनी बाहरी परतें छोड़ता रहा। पीछे अत्यंत गर्म श्वेत बौना बचा, जिसका विकिरण अब निकली हुई गैस को बाहर धकेल रहा है। नाम के बावजूद ग्रहीय नीहारिका का ग्रहों से संबंध नहीं होता।
वेब ने निकट अवरक्त कैमरा NIRCam और मध्य अवरक्त उपकरण MIRI के आंकड़े जोड़े। इन मापों ने उन संरचनाओं को स्पष्ट किया जो हबल की वर्ष 2000 की दृश्य प्रकाश वाली तस्वीर में धुंधली थीं। चेहरे जैसी आयनित गैस की बुलबुली केंद्रीय श्वेत बौने को घेरती है, जबकि प्रकाशित धूल का चौड़ा खोल अयाल जैसा दिखता है। उपकरण छल्लों, खोलों और धूमकेतु जैसी पूंछ वाले पदार्थ को भी अलग दिखाते हैं।
नासा के अनुसार फैलती अंदरूनी बुलबुली अपने रास्ते की धूल नष्ट कर रही है, जबकि घने गुच्छे केंद्रीय तारे के विकिरण को सहते हुए अपने पीछे के पदार्थ की रक्षा करते हैं। मध्य अवरक्त आंकड़ों में धूल के कुछ तंतु अब भी बचे दिखते हैं। खगोलविद यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ग्रहीय नीहारिकाओं में सरल और समान रूप से फैलती संरचना के बजाय इतने जटिल छल्ले और खोल क्यों बनते हैं।
यह अवलोकन सामान्य तारों के जीवन चक्र की एक छोटी अवस्था का विस्तृत चित्र देता है। ऐसे तारे ब्रह्मांड में दिखाई देने वाली धूल का बड़ा हिस्सा बनाते हैं। NGC 2392 की गैस और धूल श्वेत बौने से दूर जाती रहेगी और खगोलविदों का अनुमान है कि पहचाने जाने योग्य नीहारिका लगभग 10,000 वर्षों में बिखर जाएगी। आगे का विश्लेषण वेब के पूरक अवरक्त क्षेत्रों से पता लगा सकेगा कि विकिरण तारकीय मलबे को कैसे बदलता है।
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