कैलिफोर्निया की भू-तापीय जलधारा में मिला एक नया अमीबा 63 डिग्री सेल्सियस पर प्रजनन कर सकता है। यह केंद्रक वाली कोशिकाओं के जीवों, यानी यूकैरियोट, के लिए अब तक दर्ज वृद्धि का सबसे ऊँचा तापमान है। सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष 22 सितंबर को समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका Cell में प्रकाशित किया। Incendiamoeba cascadensis नाम की यह प्रजाति जटिल कोशिकाओं की वृद्धि की ज्ञात सीमा को तीन डिग्री बढ़ाती है।
इससे पहले वैज्ञानिकों ने यूकैरियोट की वृद्धि लगभग 60 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज की थी, जबकि कुछ बैक्टीरिया और आर्किया इससे कहीं अधिक गर्मी सह सकते हैं। यह अंतर अहम है, क्योंकि कोशिका विभाजन के लिए केंद्रक और दूसरी आंतरिक संरचनाओं का काम करते रहना आवश्यक है। खोज केवल एक सूक्ष्म प्रजाति के बारे में है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि जानवर या मनुष्य ऐसी गर्मी सह सकते हैं।
डॉक्टरेट शोधकर्ता एच. बेरिल रैपापोर्ट और जीवविज्ञानी एंजेला ओलिवेरियो के नेतृत्व वाली टीम ने 2023 से 2025 के बीच लासेन ज्वालामुखीय राष्ट्रीय उद्यान में हॉट स्प्रिंग्स क्रीक की एक सहायक धारा से जीवों के नमूने लिए। फिर प्रयोगशाला में अमीबा को नियंत्रित तापमान की अलग-अलग स्थितियों में विकसित किया गया। वृद्धि परीक्षण और सूक्ष्मदर्शी अवलोकन ने दिखाया कि 63 डिग्री पर उसकी कोशिकाएँ विभाजित होती रहीं; वे केवल गर्म पानी में जीवित नहीं बची थीं।
शोधकर्ताओं ने 64 डिग्री पर उसकी गति भी देखी। विश्वविद्यालय और Cell Press के अनुसार, 70 डिग्री पर अमीबा ने सुरक्षा देने वाली पुटी बनाई और तापमान घटने पर फिर सक्रिय हो सका। ये अलग-अलग सीमाएँ हैं: 63 डिग्री पर प्रजनन, 64 डिग्री पर गति और 70 डिग्री के संपर्क के बाद बच पाना। अध्ययन 70 डिग्री पर वृद्धि नहीं दिखाता।
जीनोम की तुलना में प्रोटीन की देखरेख, डीएनए की स्थिरता और आसपास के वातावरण को पहचानने से जुड़े जीन अधिक मिले। टीम ने प्रोटीन की कुछ ऐसी विशेषताएँ भी पहचानीं जो दूसरे सूक्ष्मजीवों में गर्मी सहने से जुड़ी हैं। ये निष्कर्ष संभावित कारण बताते हैं, लेकिन हर अनुकूलन की सटीक भूमिका समझने के लिए आगे प्रयोग आवश्यक हैं।
यह खोज उन स्थानों का दायरा बढ़ाती है जहाँ वैज्ञानिक यूकैरियोट जीवन तलाश सकते हैं, जिनमें दूसरे भू-तापीय क्षेत्र भी शामिल हैं। सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय के अनुसार, यह प्रजाति गर्मी सहने वाले एंजाइम और सामग्री पर भविष्य के शोध में मदद कर सकती है, हालांकि अभी कोई व्यावहारिक उपयोग सिद्ध नहीं हुआ है। आगे का शोध अन्य गर्म वातावरणों और इस अमीबा को सक्रिय रखने वाली कोशिकीय प्रक्रियाओं की जाँच कर सकता है।
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