अमेरिका और भारत के साझा उपग्रह ने रूस के क्राशेनिनिकोव ज्वालामुखी से लावा फैलने की प्रक्रिया को नए रडार क्रम में दर्ज किया है। तस्वीरें दिखाती हैं कि अंतरिक्ष से बार-बार किए गए अवलोकन दूरस्थ इलाके में विस्फोट के बदलाव कैसे दर्ज कर सकते हैं। नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के साथ विकसित निसार मिशन के आंकड़ों से यह क्रम 24 सितंबर को प्रकाशित किया। इसमें दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के मध्य तक कामचटका प्रायद्वीप में हुए बदलाव दिखाई देते हैं।
नासा के अनुसार क्राशेनिनिकोव लगभग पांच सदियों की शांति के बाद अगस्त 2025 की शुरुआत में फटा। उससे कुछ दिन पहले कामचटका के तट के पास 8.8 तीव्रता का भूकंप आया था। एजेंसी ने कहा कि उससे दो ज्वालामुखियों में से एक के सक्रिय होने की संभावना दिखती है, लेकिन कारण और परिणाम का संबंध निश्चित नहीं बताया। विस्फोट शुरू होने के बाद से उत्तरी क्रेटर से लावा पूर्व की ओर बहता रहा है।
निसार ने इस श्रृंखला की पहली तस्वीर 25 दिसंबर 2025 को ली, जब प्रक्षेपण के बाद की जांच पूरी हो रही थी। लगभग 747 किलोमीटर की ऊंचाई से उपग्रह हर बारह दिन में दो बार उसी स्थान पर लौटा, दोनों कक्षीय दिशाओं से एक-एक बार। शोधकर्ताओं ने अगस्त के मध्य तक ली गई 17 रडार तस्वीरें जोड़कर क्रम बनाया। इसमें लावा पहले भीतरी काल्डेरा भरता है, फिर बड़े क्रेटर में फैलता है और उसके बाद पंखे जैसी आकृति बनाता है।
तस्वीरें उपग्रह के एल-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार से मिलीं, जो सूक्ष्म तरंगों से जमीन का मानचित्र बनाता है। नासा के मुताबिक यह उपकरण दुनिया की लगभग सारी भूमि को कवर कर सकता है और कई मीटर के पैमाने पर विवरण दिखाता है। कॉर्नेल विश्वविद्यालय के भूभौतिकीविद और निसार वैज्ञानिक दल के सदस्य मैथ्यू प्रिचर्ड ने कहा कि नियमित तथा स्पष्ट अवलोकन प्राकृतिक खतरों की निगरानी में मिशन की क्षमता दिखाते हैं। नासा के वैज्ञानिक दृश्यांकन स्टूडियो ने एनिमेशन और अवलोकन की तारीखें भी प्रकाशित की हैं।
यह विस्फोट उन ज्वालामुखियों में बदलाव समझने का अवसर है जिन पर जमीन से लगातार नजर रखना कठिन है। नासा के अनुसार यह तरीका अनुसंधान और संभवतः आपात प्रतिक्रिया में मदद कर सकता है। हालांकि एनिमेशन पुराने अवलोकनों को जोड़ता है और वास्तविक समय की चेतावनी नहीं है। निसार का रडार डेटा अलास्का सैटेलाइट फैसिलिटी के अभिलेख में उपलब्ध है, ताकि वैज्ञानिक इस विस्फोट और दूसरे बदलते भूभागों का आगे अध्ययन कर सकें।
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