विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने 2 नवंबर को देशों से महामारी समझौते के लंबित रोगजनक साझाकरण नियम पूरे करने का आग्रह किया। जिनेवा में वार्ता शुरू करते हुए उन्होंने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला और इस वर्ष हंतावायरस के प्रकोप का उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें याद दिलाने वाला बताया कि स्वास्थ्य के खतरे सीमाएं पार करते हैं।
संगठन के अनुसार अंतरसरकारी कार्य समूह की नौवीं बैठक 2 से 13 नवंबर तक चलेगी। देशों ने व्यापक समझौता मई 2025 में अपनाया था, लेकिन रोगजनकों तक पहुंच और लाभ साझा करने का उसका परिशिष्ट, जिसे पीएबीएस कहा जाता है, अधूरा है। समूह अंतरराष्ट्रीय ढांचे के संचालन संबंधी विवरण तैयार कर रहा है।
पीएबीएस में रोगजनकों के नमूनों और आनुवंशिक अनुक्रम संबंधी आंकड़ों तक पहुंच तथा उनके इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ शामिल हैं। एएफपी के साथ यूरोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार समृद्ध और विकासशील देशों में व्यावहारिक व्यवस्था पर मतभेद जारी हैं। यह तंत्र रोगजनकों के साझाकरण को उनसे बने टीकों, निदान जांच और उपचार के न्यायसंगत वितरण से जोड़ता है।
टेड्रोस ने कहा कि कोविड-19 ने इन दोनों तरह की पहुंच को अलग रखने के परिणाम दिखाए। टीके अभूतपूर्व गति से आए, फिर भी कई देश इंतजार करते रहे जबकि अन्य ने जरूरत से अधिक आपूर्ति सुनिश्चित की। उनके आकलन में इस असंतुलन से जानें गईं, महामारी लंबी चली और नए स्वरूपों का जोखिम बढ़ा।
यूरोन्यूज के अनुसार यूरोप के लिए संगठन के क्षेत्रीय निदेशक हांस क्लूगे ने कहा कि सभी छह क्षेत्रों में उनकी बैठकों के दौरान समय पर टीके और सस्ती दवाएं बार-बार उठने वाले मुद्दे थे। संगठन के नेतृत्व की उम्मीदवारी के लिए विशेष अवकाश पर चल रहे क्लूगे ने नमूनों और आंकड़ों के तेज साझाकरण के साथ उनसे विकसित चिकित्सा उत्पादों तक न्यायसंगत पहुंच मांगी।
टेड्रोस ने प्रतिनिधियों से समाधान खोजने, आवश्यक और वांछनीय मांगों में अंतर करने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ के आधार पर प्रस्ताव परखने को कहा। उनके उद्घाटन भाषण में अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई। इस दौर का काम लागू किए जा सकने वाले ऐसे नियम बनाना है जो अनुभव से बेहतर हों और अगले महामारी खतरे पर देशों को अधिक तेजी और समानता से प्रतिक्रिया देने में मदद करें।
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