बुल्गारिया की संसद ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए 25 अक्टूबर की तारीख तय कर दी है। इसके साथ ऐसी राष्ट्रीय चुनावी मुहिम शुरू होगी जो प्रधानमंत्री रूमेन रादेव की सत्तारूढ़ प्रोग्रेसिव बुल्गारिया पार्टी की ताकत की परीक्षा लेगी। एसोसिएटेड प्रेस ने 31 जुलाई को सोफिया से इस फैसले की जानकारी दी। सांसदों ने यूरोपीय संघ के लगभग 65 लाख आबादी वाले इस सदस्य देश के मतदाताओं के लिए मतदान की तारीख तय की।
राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से औपचारिक है, क्योंकि कार्यकारी अधिकार काफी हद तक प्रधानमंत्री और संसद के पास रहते हैं। फिर भी राष्ट्राध्यक्ष सशस्त्र बलों का नेतृत्व करते हैं, कानून पर वीटो लगा सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय संधियों पर हस्ताक्षर करते हैं। इन अधिकारों के कारण चुनाव का संवैधानिक और कूटनीतिक महत्व दैनिक शासन में इस पद की सीमित भूमिका से अधिक है।
प्रोग्रेसिव बुल्गारिया ने मौजूदा राष्ट्रपति इलियाना योतोवा का समर्थन किया है। रादेव के पद छोड़ने, राजनीतिक आंदोलन बनाने और दलीय राजनीति में आने के बाद राष्ट्रपति बनने से पहले वह नौ वर्ष तक उनकी उपराष्ट्रपति थीं। बुल्गारिया के राष्ट्रपति कार्यालय और संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड इस संस्थागत बदलाव की पुष्टि करते हैं। राष्ट्रीय चुनाव रिपोर्टों ने अप्रैल के संसदीय चुनाव में रादेव की नई राजनीतिक शक्ति को स्पष्ट विजेता बताया था।
रादेव ने राष्ट्रपति के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए और अप्रैल के आम चुनाव में प्रोग्रेसिव बुल्गारिया की बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री बने। उस नतीजे ने बंटी हुई संसदों और बार-बार होने वाले चुनावों के लंबे दौर को समाप्त किया। इसलिए अक्टूबर का मतदान पहली राष्ट्रीय कसौटी होगा कि सत्तारूढ़ पार्टी संसद और मंत्रिमंडल के अपने हाल के प्रभुत्व को अलग से चुने जाने वाले राष्ट्रपति पद तक बढ़ा पाती है या नहीं।
बुल्गारिया के नागरिक पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति को सीधे चुनते हैं और कोई व्यक्ति दो से अधिक कार्यकाल पूरा नहीं कर सकता। पहले दौर में जीत के लिए उम्मीदवार को सबसे अधिक मत मिलने के साथ आधे से अधिक पात्र मतदाताओं की भागीदारी भी आवश्यक है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, यदि 25 अक्टूबर को इन शर्तों के तहत विजेता तय नहीं होता, तो दो प्रमुख उम्मीदवार एक नवंबर को दूसरे दौर में आमने-सामने होंगे।
योतोवा की जीत से राष्ट्रपति पद और सरकार लंबे समय से जुड़े राजनीतिक सहयोगियों के हाथ में रहेंगे, जबकि विपक्ष का मजबूत प्रदर्शन रादेव के जनादेश की सीमा दिखा सकता है। दलों को अब नामांकन पूरे करने और अभियान की तैयारी करने की जरूरत है। चुनाव अधिकारी पहले दौर से पहले पंजीकरण और मतदान व्यवस्था की निगरानी करेंगे। अंतिम राजनीतिक असर उम्मीदवारों की सूची, मतदान प्रतिशत और चुनाव के निर्धारित दूसरे दौर तक पहुंचने पर निर्भर करेगा।
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