कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने 31 अगस्त को हुए तीनों संघीय उपचुनाव जीत लिए और अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार विवाद के बीच हाउस ऑफ कॉमन्स में अपनी बहुमत की स्थिति मजबूत कर ली। इलेक्शंस कनाडा के प्रारंभिक नतीजों के अनुसार लिबरल उम्मीदवारों ने क्यूबेक की शिकूटिमी–ले फियोर्ड, ओंटारियो की बीचेज–ईस्ट यॉर्क और ब्रिटिश कोलंबिया की नॉर्थ वैंकूवर–कैपिलानो सीट पर जीत दर्ज की।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार इन जीतों से 343 सदस्यीय सदन में लिबरल पार्टी के पास 173 सीटें हो गईं, जिससे सरकार को कानून आगे बढ़ाने के लिए अधिक गुंजाइश मिली है। पार्टी ने पहले से लिबरल प्रतिनिधित्व वाली दो सीटें बचाईं और 2018 से कंजर्वेटिव पार्टी के पास रही शिकूटिमी–ले फियोर्ड सीट छीन ली। रॉयटर्स ने नतीजे को वॉशिंगटन से तनाव के दौर में कार्नी के छोटे संसदीय बहुमत की मजबूती बताया।
क्यूबेक की प्रतियोगिता में सबसे स्पष्ट राजनीतिक बदलाव दिखा। लिबरल उम्मीदवार डेनियल गोबेई ने उस सीट पर आसानी से जीत हासिल की जहां 2025 के आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी को 34 प्रतिशत वोट मिले थे। एपी के अनुसार उपचुनाव में उसका समर्थन घटकर करीब 13 प्रतिशत रह गया और वह तीसरे स्थान पर पहुंच गई। इस क्षेत्र के एल्यूमिनियम उत्पादक, वन उद्योग और डेयरी फार्म सीमा शुल्क से प्रभावित हैं, इसलिए राष्ट्रीय व्यापार संघर्ष यहां सीधा स्थानीय मुद्दा है।
टोरंटो में तनवीर शाहनवाज ने लिबरल पार्टी के लिए बीचेज–ईस्ट यॉर्क सीट बरकरार रखी, जबकि कार्नी के पूर्व वरिष्ठ सहयोगी ब्रेडन केली ने ब्रिटिश कोलंबिया में नॉर्थ वैंकूवर–कैपिलानो जीती। कनाडियन प्रेस ने बताया कि न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी ने टोरंटो में अपना वोट प्रतिशत सुधारा, लेकिन वह लिबरल उम्मीदवार से हजारों मत पीछे रही। तीनों चुनाव 2026 में पूर्व सांसदों के इस्तीफों के बाद कराए गए।
मतदान से पहले 21 अगस्त को कनाडा और अमेरिका की व्यापार वार्ता विफल हो गई थी। एपी के अनुसार अमेरिका ने लगभग 20 अरब डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है और करीब इतनी ही कीमत के अमेरिकी उत्पादों पर कनाडा के जवाबी शुल्क 8 सितंबर से लागू होने हैं। कार्नी ने कहा है कि कनाडा को अपनी संप्रभुता की रक्षा, प्रमुख उद्योगों का संरक्षण और सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार से आगे संबंधों का विविधीकरण करना होगा।
कार्नी ने कहा कि नतीजे सरकार की योजना में विश्वास दिखाते हैं, जबकि विपक्षी दलों पर अपनी रणनीति की समीक्षा का दबाव बढ़ गया है। एपी और कनाडाई मीडिया से बात करने वाले राजनीति विशेषज्ञों ने क्यूबेक के परिणाम को वॉशिंगटन से वार्ता रोकने के कार्नी के निर्णय और अमेरिकी दबाव को लेकर स्थानीय चिंता से जोड़ा। आने वाले महीनों में छह और संघीय उपचुनाव अपेक्षित हैं, जो बताएंगे कि यह बदलाव इन तीन सीटों से आगे कायम रहता है या नहीं।
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