कोसोवो के सत्तारूढ़ वेतेवेंदोसिये आंदोलन और विपक्षी डेमोक्रेटिक लीग ऑफ कोसोवो ने सोमवार 31 अगस्त को कानून के प्रोफेसर और पूर्व राजनयिक बेकिम सेइदिउ को राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन देने पर सहमति बनाई। रॉयटर्स और कोसोवो की संसद ने इसकी पुष्टि की। कार्यवाहक प्रधानमंत्री अल्बिन कुर्ती और लुमिर अब्दिजिकु के नेतृत्व वाले दलों का यह समझौता लंबे संस्थागत गतिरोध से निकलने का रास्ता दे सकता है, लेकिन 120 सदस्यीय विधानसभा को अभी सेइदिउ को निर्वाचित करना है।
रॉयटर्स के अनुसार 51 वर्षीय सेइदिउ प्रिस्टिना विश्वविद्यालय में कानून पढ़ाते हैं और पहले तुर्किये में कोसोवो के राजदूत तथा न्यूयॉर्क में महावाणिज्य दूत रह चुके हैं। दोनों नेताओं ने सर्वसम्मत उम्मीदवार पर बातचीत के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में उन्हें प्रस्तुत किया। विधानसभा अध्यक्ष और कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष अल्बुलेना हाजिउ ने समझौते को पूरी तरह काम करने वाली संस्थाओं की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और सांसदों से प्रक्रिया को जिम्मेदारी से पूरा करने को कहा।
राष्ट्रपति पद कोसोवो के राजनीतिक संकट के केंद्र में रहा है। दल मार्च में वियोसा उस्मानी का उत्तराधिकारी तय नहीं कर पाए थे, जिसके बाद संवैधानिक विवाद का एक और दौर शुरू हुआ और 7 जून को समय से पहले संसदीय चुनाव कराया गया। उस मतदान में वेतेवेंदोसिये पहले स्थान पर रहा और एलडीके एक प्रमुख विपक्षी शक्ति बनी रही, लेकिन राष्ट्रपति चयन की प्रक्रिया में आवश्यक विशेष बहुमत किसी एक खेमे के पास नहीं है।
रॉयटर्स ने बताया कि कुर्ती को सरकार बनाने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों के केवल कुछ मत चाहिए, जबकि राष्ट्रपति चुनने के लिए संसद में अधिक व्यापक भागीदारी और समर्थन आवश्यक है। एपी के अनुसार 120 सदस्यीय विधानसभा में दस सीटें सर्ब अल्पसंख्यक और दस अन्य अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं। इसलिए वीवी और एलडीके का समझौता महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सबसे बड़ी सत्तारूढ़ शक्ति और एक बड़े विपक्षी गुट को एक उम्मीदवार के पीछे लाता है।
यह समझौता अपने आप सेइदिउ को राष्ट्राध्यक्ष नहीं बनाता और संसदीय मतदान अगली निर्णायक परीक्षा है। दूसरे दल तथा अल्पसंख्यक सांसद उपस्थिति, कोरम और अंतिम मतगणना को प्रभावित कर सकते हैं। बार-बार विफल प्रयासों और लगातार चुनावों के बाद यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोसोवो लंबे समय तक कार्यवाहक व्यवस्थाओं के तहत चला और आर्थिक तथा प्रशासनिक प्राथमिकताओं से निपटने की उसकी क्षमता सीमित रही।
सफल मतदान से नेताओं को स्थिर संस्थाएं बनाने, जीवन स्तर सुधारने और यूरोपीय संघ तथा नाटो के साथ निकट एकीकरण की घोषित आकांक्षा आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। सर्बिया के साथ संबंध भी बड़ी बाहरी चुनौती हैं, क्योंकि वह कोसोवो की 2008 की स्वतंत्रता घोषणा को मान्यता नहीं देता। संसद ने अभी चुनाव पूरा नहीं किया है, इसलिए सोमवार के समझौते की मजबूती का आकलन तभी होगा जब सांसद एकत्र होकर अपने मत डालेंगे।
टिप्पणियाँ