वंशानुगत आनुवंशिक अंतर डीएनए क्षति के बाद केवल कैंसर होने की संभावना को ही नहीं, बल्कि ट्यूमर के विकास की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने सोमवार को यह शोध जारी किया। नेचर में सहकर्मी समीक्षा के बाद प्रकाशित अध्ययन ने चूहों में यकृत कैंसर के नियंत्रित मॉडल का उपयोग किया और आनुवंशिक पृष्ठभूमि को उत्परिवर्तन के चयन, ट्यूमर वृद्धि तथा रोग की संवेदनशीलता से जोड़ा।
सारा एटकेन, डंकन ओडोम और मार्टिन टेलर के संयुक्त नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय दल ने वंशानुगत प्रभावों को जीवनशैली और पर्यावरण के उन अंतरों से अलग करने की कोशिश की जो मनुष्यों पर अध्ययन को कठिन बनाते हैं। शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक रूप से अलग चार चूहा नस्लें लीं, जिनकी संयुक्त विविधता मानव आबादियों के बीच दिखने वाली विविधता के बराबर थी। लिंग, रहने की दशा और कैंसरकारी पदार्थ का संपर्क समान रखा गया।
हर चूहे को 15 दिन की आयु में डाइएथिलनाइट्रोसामीन की समान मात्रा दी गई। यह रसायन यकृत कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाता है और तंबाकू के धुएं तथा कुछ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में भी मिलता है। दल ने लगभग 600 ट्यूमर के जीनोम अनुक्रमित किए, जीन गतिविधि मापी, ऊतकों की जांच की और उपचार न पाने वाले चूहों से तुलना की। इससे समान परिस्थितियों में शुरुआती ट्यूमर विकास को सैकड़ों बार दोहराकर समझना संभव हुआ।
चारों नस्लों के ट्यूमर में लगभग हमेशा कैंसर से जुड़े एमएपीके संकेत मार्ग को सक्रिय करने वाला चालक उत्परिवर्तन आया, लेकिन चुना गया चालक जीन और सटीक बदलाव वंशानुगत पृष्ठभूमि के अनुसार अलग थे। शोधपत्र में पूरे जीनोम की प्रतिलिपि बनने और शुरुआती उपसमूह कोशिकाओं के बचने में भी नस्ल विशेष पैटर्न मिले। सबसे संवेदनशील C3H नस्ल में अक्सर एक चालक बदलाव पर्याप्त था, जबकि अन्य नस्लों में आम तौर पर कम से कम दो आवश्यक थे।
लेखकों ने कहा कि वंशानुगत जर्मलाइन रूपों और कोशिकाओं में बाद में आए उत्परिवर्तनों की परस्पर क्रिया ट्यूमर को आकार देने वाले चयन दबाव बदल सकती है। उनका निष्कर्ष है कि कैंसर अध्ययन की योजना और परिणामों की व्याख्या में पर्यावरणीय संपर्क तथा ट्यूमर उत्परिवर्तन के साथ आनुवंशिक पृष्ठभूमि को भी शामिल करना चाहिए, खासकर जब अध्ययन समूह पर्याप्त आनुवंशिक विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
नतीजे मरीजों के लिए कोई नया परीक्षण या उपचार स्थापित नहीं करते। प्रयोग यकृत के कैंसरकारी पदार्थ के संपर्क में आए चूहों पर हुए और यह जानने के लिए आगे शोध जरूरी है कि ये पैटर्न मानव कैंसर पर कितने लागू होते हैं। यदि मानव अध्ययन प्रभाव की पुष्टि करते हैं, तो वंशानुगत विविधता जोखिम आकलन, जांच की रूपरेखा और कैंसर दवाओं पर अलग-अलग प्रतिक्रिया को समझने में सुधार ला सकती है।
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