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नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में कम से कम 160 लोगों की मौत

प्रकाशित 26 अगस्त 2026 0 दृश्य

नेपाल पुलिस और चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, बुधवार को नेपाल-चीन सीमा के पास हिमालयी बस्तियों में पानी, कीचड़ और चट्टानों की अचानक आई विशाल लहर से कम से कम 160 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस ने 157 मौतों की पुष्टि की, जबकि सीसीटीवी ने तिब्बत की ग्यिरोंग काउंटी में तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की सूचना दी। बचाव दलों को दूरस्थ घाटियों तक पहुंचने में कठिनाई के कारण आंकड़े अभी अस्थायी हैं।

नेपाल में अधिकारियों ने बताया कि 403 लोग लापता हैं, जिनमें 341 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें कैलाश पर्वत की ओर जा रहे तीर्थयात्री और पर्यटक, स्थानीय निवासी, श्रमिक तथा सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों ने भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिकों को लापता लोगों में गिना है। कई सरकारों ने यात्रियों से स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा है।

बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट जिलों की बस्तियों को तबाह किया तथा सड़कों, पुलों, संचार व्यवस्था, बिजली नेटवर्क और जलविद्युत संयंत्रों को नुकसान पहुंचाया। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों द्वारा जांची गई तस्वीरों में इमारतें मोटे कीचड़ में दबी, वाहन बहते और नदी किनारे के घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दिए। अधिकारियों ने भोटे कोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के पास रहने वालों को पानी से दूर ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा।

काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट के वैज्ञानिकों ने कहा कि हिमनद से गिरी बर्फ और चट्टानों की हिमस्खलन ने संभवतः एक सहायक नदी को रोका और फिर नीचे की ओर हिंसक लहर छोड़ी। माप से एक स्थान पर त्रिशूली नदी का जलस्तर लगभग 30 मिनट में नौ मीटर तक बढ़ने का संकेत मिला। विशेषज्ञों ने कहा कि सटीक घटनाक्रम की जांच जारी है और आसपास दर्ज भूकंप को अभी कारण साबित नहीं किया गया है।

नेपाल ने सैनिक, पुलिस, चिकित्सा दल और हेलीकॉप्टर तैनात किए, लेकिन ऊंचे जलस्तर, क्षतिग्रस्त मार्गों और लगातार मानसूनी बारिश ने सबसे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बाधित की। चीन ने भी ग्यिरोंग के पास बड़े स्तर पर तलाश शुरू की। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ऊपर जमा बर्फ, चट्टान और मलबा दूसरी लहर पैदा कर सकता है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र और भारत के निचले इलाकों में निकासी तथा निगरानी की जरूरत बढ़ गई है।

इसी गलियारे में पिछले वर्ष आई घातक बाढ़ ने एक महत्वपूर्ण पुल नष्ट कर दिया था और नेपाल-चीन व्यापार महीनों बाधित रहा था। शोधकर्ताओं के अनुसार बढ़ते तापमान के साथ हिंदू कुश हिमालय के हिमनद तेज गति से बर्फ खो रहे हैं, जिससे अस्थिर ढलानों और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ता है। अब प्राथमिकताएं जीवित लोगों को खोजना, संपर्क बहाल करना और यह पता लगाना हैं कि नदी में अन्य अवरोध नीचे की बस्तियों के लिए खतरा तो नहीं हैं।

स्रोत: Associated Press, Reuters, The Guardian, International Centre for Integrated Mountain Development

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