होम पर वापस जाएं प्लेसीबो गोलियाँ केवल तीन सप्ताह में बुजुर्गों की स्मृति और शारीरिक प्रदर्शन में सुधार करती हैं स्वास्थ्य

प्लेसीबो गोलियाँ केवल तीन सप्ताह में बुजुर्गों की स्मृति और शारीरिक प्रदर्शन में सुधार करती हैं

प्रकाशित 25 जून 2026 686 दृश्य

मिलान की यूनिवर्सिता कत्तोलिका के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक क्रांतिकारी अध्ययन में पाया गया है कि प्लेसीबो गोलियाँ केवल तीन सप्ताह में बुजुर्गों की स्मृति, शारीरिक प्रदर्शन और समग्र कल्याण में उल्लेखनीय सुधार कर सकती हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लिनिकल अंड हेल्थ साइकोलॉजी में प्रकाशित इन निष्कर्षों ने प्लेसीबो प्रभाव के बारे में स्थापित धारणाओं को चुनौती दी है और बिना दवाई के हस्तक्षेप के स्वस्थ बुढ़ापे को समर्थन देने की नई संभावनाएँ खोलती हैं।

अध्ययन में 90 स्वस्थ बुजुर्ग वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें यादृच्छिक रूप से तीन समूहों में विभाजित किया गया। पहला समूह नियंत्रण समूह था जिसे कोई हस्तक्षेप नहीं मिला। दूसरे समूह को भ्रामक प्लेसीबो दिया गया, जहाँ प्रतिभागियों को बताया गया कि गोलियों में सक्रिय तत्व हैं। तीसरे समूह को खुला प्लेसीबो दिया गया, जहाँ प्रतिभागियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि गोलियाँ निष्क्रिय हैं लेकिन प्राकृतिक उपचार तंत्रों के माध्यम से लाभदायक मन-शरीर प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर सकती हैं।

परिणाम शोधकर्ताओं के लिए भी आश्चर्यजनक रहे। खुले प्लेसीबो समूह में अल्पकालिक स्मृति में नियंत्रण समूह की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ। शारीरिक प्रदर्शन में भ्रामक प्लेसीबो समूह में 7 प्रतिशत और खुले प्लेसीबो समूह में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। सबसे उल्लेखनीय बात यह थी कि जिस समूह को पता था कि उनकी गोलियाँ नकली हैं, उसने सबसे मजबूत परिणाम दिखाए।

संज्ञानात्मक और शारीरिक लाभों के अलावा, खुले प्लेसीबो समूह के प्रतिभागियों ने अन्य दोनों समूहों की तुलना में कम तनाव के स्तर की सूचना दी। यह खोज सुझाती है कि प्लेसीबो का पारदर्शी प्रशासन मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर सकता है जो साधारण अपेक्षा प्रभावों से परे हैं, और संभवतः आत्म-उपचार और तनाव नियमन के गहरे तंत्रों को सक्रिय करती है।

इस शोध का नेतृत्व दिलेत्ता बार्बियानी, अलेसांद्रो अंतोनिएत्ती और फ्रांचेस्को पान्यीनी ने किया, जिन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अध्ययन परंपरागत धारणा को मूल रूप से चुनौती देता है कि प्लेसीबो के काम करने के लिए धोखा आवश्यक है। उनका कार्य दर्शाता है कि उपचार की प्लेसीबो प्रकृति के बारे में ईमानदारी उसकी प्रभावशीलता को कम नहीं करती और वास्तव में इसे बढ़ा सकती है।

उम्र अनुसंधान के क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सावधानीपूर्ण आशावाद व्यक्त किया। अध्ययन सुझाता है कि खुले प्लेसीबो स्वस्थ बुढ़ापे को बढ़ावा देने के लिए एक कम लागत, सुलभ और नैतिक रूप से स्वीकार्य उपकरण हो सकते हैं। पारंपरिक दवाई दृष्टिकोणों के विपरीत, खुले प्लेसीबो में दुष्प्रभावों का कोई जोखिम नहीं है और किसी धोखे की आवश्यकता नहीं है।

शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि बड़े नमूने आकारों के साथ और अध्ययनों की आवश्यकता है, उनके निष्कर्ष वृद्धावस्था देखभाल में मन-शरीर हस्तक्षेपों को एकीकृत करने की दिशा में एक आशाजनक कदम हैं। यह अध्ययन साक्ष्यों के बढ़ते समूह में जुड़ता है जो दर्शाता है कि प्लेसीबो प्रभाव केवल धोखे का परिणाम नहीं है, बल्कि एक वास्तविक शारीरिक घटना है जिसे पारदर्शी रूप से दुनिया भर के बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए उपयोग किया जा सकता है।

स्रोत: SciTechDaily, Medical Xpress, News-Medical, International Journal of Clinical and Health Psychology

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