नाइजर की सैन्य सरकार का सोमवार को राजधानी नियामे पर नियंत्रण बना रहा। सप्ताहांत में वफादार सैनिकों ने रूस के अफ्रीका कोर की मदद से उस सैन्य विद्रोह को पराजित कर दिया, जो 2023 में सत्ता पर कब्जे के बाद जुंटा के लिए सबसे गंभीर आंतरिक चुनौती था। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, बागी सैनिकों ने एक रणनीतिक वायु सैनिक अड्डे पर अपने साथियों को बंधक बनाया और राष्ट्रपति भवन के पास गोलीबारी की, जिसके बाद सरकारी बलों ने उन्हें काबू किया।
यह टकराव करीब चौबीस घंटे चला और मुख्य रूप से डियोरी हमानी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के भीतर स्थित बेस 101 तथा राष्ट्रपति कार्यालय वाले इलाके में केंद्रित रहा। विश्लेषकों और राजनयिकों के हवाले से एपी ने बताया कि अधिकतर युवा सैनिकों ने बंधक बनाए और वफादार इकाइयों का विरोध किया। सरकारी टेलीविजन ने बाद में हिरासत में लिए गए सैनिक दिखाए। अधिकारियों ने दर्जनों बागियों के मारे जाने या गिरफ्तार होने की बात कही, लेकिन सटीक संख्या या आरोप घोषित नहीं किए।
नाइजर में रूस के राजदूत विक्टर वोरोपायेव ने रूसी मीडिया से कहा कि नियामे ने सहायता मांगी थी और अफ्रीका कोर के सदस्यों ने विद्रोह समाप्त करने में मदद की। एपी के अनुसार, रूसी बलों ने निर्णायक चरण में जमीनी और हवाई सहायता दी। नाइजर के अधिकारियों ने सोमवार तक इस हस्तक्षेप का सार्वजनिक विवरण नहीं दिया था, इसलिए रूस की अभियानगत भूमिका के बारे में राजदूत, राजनयिक और विश्लेषक ही प्रमुख स्रोत हैं।
अल्जीरिया ने भी रविवार को दो गश्ती दलों में चार सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमान और उनके साथ ईंधन भरने वाला एक विमान नियामे भेजा। अल्जीरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति अब्देलमदजीद तेब्बून ने नाइजर के अधिकारियों के अनुरोध के बाद यह अभियान मंजूर किया। मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, नाइजर के प्रधानमंत्री महामाने लामिन जीन ने विमानों का स्वागत किया और अल्जीरिया को सहायता के लिए धन्यवाद दिया।
अशांति ने जनरल अब्दुर्रहमान तियानी के प्रशासन पर दबाव उजागर किया है, क्योंकि नाइजर बढ़ती चरमपंथी हिंसा से जूझ रहा है। एपी के मुताबिक हवाई अड्डे पर 2026 में पहले ही दो जिहादी हमले हुए हैं। जनवरी में इस्लामिक स्टेट से जुड़े संगठन ने ड्रोन उपकरणों को निशाना बनाया था, जबकि जून में अल-कायदा से जुड़े समूह के हमले में ग्यारह सैनिक और दो नागरिक मारे गए थे। नाइजर ने फ्रांस और अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग घटाया और रूस से संबंध मजबूत किए हैं।
नियामे में शांति और सामान्य गतिविधियां लौट आईं, लेकिन कई हिरासत में लिए गए बागियों का भविष्य और हताहतों की पूरी संख्या स्पष्ट नहीं है। रूस और अल्जीरिया की संयुक्त प्रतिक्रिया ने दिखाया कि 2023 के तख्तापलट के बाद नाइजर की सुरक्षा साझेदारियां कितनी बदल गई हैं। अब अधिकारियों के सामने सेना की एकजुटता, बंदियों पर कानूनी कार्रवाई और उस सशस्त्र हिंसा को रोकने में विदेशी सहायता की क्षमता से जुड़े सवाल हैं, जिसने सैनिकों में असंतोष बढ़ाया।
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