नेपाल ने बारिश और कोहरे के कारण थोड़े समय तक रुकी खोज तथा बचाव उड़ानें शनिवार को फिर शुरू कर दीं। नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ में संयुक्त मृतक संख्या 676 हो गई है और लगभग 3,000 लोग अब भी लापता हैं। रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार नेपाल की आपदा एजेंसी ने 669 मौतें और 2,426 लापता दर्ज किए, जबकि चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में सात मौतों और 550 से अधिक लापता लोगों की सूचना दी।
बुधवार को पानी का तेज बहाव पहाड़ी घाटियों से चट्टानें, बर्फ, कीचड़ और मलबा लेकर बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली संयंत्रों से टकराया। रॉयटर्स ने इस बाढ़ को ग्लेशियर के ढहने से जोड़ा, लेकिन नेपाल के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि कारण अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है। अधिकारी ऊपरी क्षेत्र की दो झीलों की निगरानी कर रहे हैं, क्योंकि पानी सुरक्षित रूप से निकलने तक अतिरिक्त बाढ़ का खतरा बना रहेगा।
मौसम सुधरने पर हेलीकॉप्टर सबसे अधिक प्रभावित जिलों में लौटे, वे भोजन, कपड़े और अन्य राहत सामग्री ले गए तथा जीवित बचे लोगों को बाहर लाए। एपी के अनुसार नेपाल में 3,700 से अधिक लोगों को बचाया गया था, जबकि बाद की सरकारी जानकारी में सुरक्षित निकाले गए लोगों की संख्या 4,450 से अधिक बताई गई, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि मैदानी सत्यापन के साथ हताहतों और बचाव के आंकड़े बदल सकते हैं।
सरकार ने बताया कि खोज दल, सुरक्षा बल, चिकित्सा कर्मी और स्थानीय अधिकारी रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में काम कर रहे हैं। नेपाल ने उन सुरंगों को खोलने के लिए विशेष विदेशी सहायता मांगी है जिनमें लोग फंसे हो सकते हैं, साथ ही जीवित लोगों का पता लगाने वाली तकनीक, तेज डीएनए जांच और अतिरिक्त शवगृह क्षमता की मांग की है। एक विशेष आपात नियंत्रण कक्ष विदेशी नागरिकों की जानकारी और उनके परिवारों से संपर्क का समन्वय कर रहा है।
आपदा का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव है, क्योंकि सैकड़ों विदेशी यात्री और तीर्थयात्री लापता लोगों में शामिल हैं। रॉयटर्स के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में कम से कम 540 विदेशी नागरिकों का पता नहीं चल पाया है, जिनमें भारत के अनेक हिंदू तीर्थयात्री हैं। मलेशिया और अन्य देशों के परिवार प्रमाणित जानकारी मांग रहे हैं। काठमांडू में परिजन मुख्य सरकारी अस्पताल के बाहर जुटे और सूचना के लिए आधिकारिक सूचियां तथा तस्वीरें देखते रहे।
नेपाल के वित्त मंत्री ने रॉयटर्स से कहा कि इमारतें, परिवहन संपर्क और बिजली केंद्र बह जाने के बाद पुनर्निर्माण पर चार से पांच अरब डॉलर लग सकते हैं। राहत अभियान में चिकित्सा देखभाल, भोजन, सुरक्षित पेयजल और अस्थायी आश्रय को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने जनता और समाचार माध्यमों से केवल सत्यापित सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा है, जबकि बचाव दल अस्थिर भूभाग में खोज कर रहे हैं और अधिकारी नुकसान के पूरे स्तर का आकलन कर रहे हैं।
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