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ट्रंप ने डाक मतपत्र नियमों की लड़ाई फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचाई

प्रकाशित 4 सितंबर 2026 0 दृश्य

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने गुरुवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से डाक सेवा को डाक मतपत्रों पर नए नियम लागू करने की अनुमति देने को कहा। इससे तीन नवंबर के मध्यावधि चुनाव से दो महीने से भी कम समय पहले कानूनी संघर्ष तेज हो गया है। आपात आवेदन में बोस्टन की संघीय न्यायाधीश इंदिरा तलवानी के अस्थायी आदेश को हटाने की मांग की गई है, जबकि नॉर्थ कैरोलाइना शुक्रवार से मतपत्र भेजना शुरू कर रहा है और अन्य राज्य सितंबर में ऐसा करने की तैयारी में हैं।

डाक सेवा का नियम राज्य और स्थानीय चुनाव कार्यालयों को एजेंसी से स्वीकृत भेजने और लौटाने वाले लिफाफे इस्तेमाल करने के लिए बाध्य करता है, जिन पर प्रत्येक मतदाता के लिए अलग बारकोड होगा। अधिकारियों को मतदाताओं के नाम, पते और बारकोड संबंधी जानकारी एक संघीय पोर्टल पर डालनी होगी। नियम पूरा न करने वाली चुनावी डाक मतदाता तक पहुंचने के बजाय कार्यालय को लौटाई जा सकती है, हालांकि सरकार का कहना है कि डाक सेवा किसी व्यक्ति की मतदान पात्रता तय नहीं करेगी।

तलवानी ने 27 अगस्त को अनिवार्य प्रावधानों पर चौदह दिनों के लिए रोक लगाई थी। उनकी अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता संभवतः यह साबित कर सकते हैं कि एजेंसी के पास नियम बनाने का अधिकार नहीं था और यह चुनाव संचालन में राज्यों की संवैधानिक भूमिका से टकराता है। सरकार के सुप्रीम कोर्ट आवेदन के साथ लगे एक अन्य आदेश में उन्होंने कहा कि संघीय डाक व्यवस्था के उपयोग से पहले अधिकारियों को लिफाफों की मंजूरी लेनी होगी और हर मतदाता की जानकारी प्रमाणित करनी होगी।

न्याय विभाग का तर्क है कि ये शर्तें चुनाव नहीं बल्कि डाक व्यवस्था को नियंत्रित करती हैं और डिजाइन तथा सूचना मानकों को धोखाधड़ी के विरुद्ध सीमित सुरक्षा बताता है। डेमोक्रेट नेतृत्व वाले राज्यों और मतदान अधिकार संगठनों का कहना है कि सामग्री पहले ही छप चुकी है तथा मतदान के इतने करीब लिफाफे बदलना, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना और रिकॉर्ड अपलोड करना खर्च और भ्रम बढ़ाएगा। उनके अनुसार इससे वैध मतपत्र देर से पहुंचने या अस्वीकार होने का खतरा है। एपी और सीबीएस के अनुसार प्रशासन ने व्यापक डाक मतदान धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के रूढ़िवादी बहुमत ने 24 अगस्त को पहले की रोक हटा दी थी, क्योंकि अंतिम डाक नियम जारी होने से पहले दायर चुनौती को समयपूर्व माना गया था। उस फैसले ने प्रतिबंधों की वैधता तय नहीं की। नया आवेदन अब अंतिम रूप दिए गए नियम से संबंधित है और सीबीएस के अनुसार न्यायमूर्ति केतनजी ब्राउन जैक्सन ने राज्यों और मतदान अधिकार समूहों से मंगलवार सुबह तक जवाब मांगा है।

यह विवाद ऐसे चुनाव में वास्तविक मतदान शुरू होने के साथ चल रहा है जो ट्रंप के शेष कार्यकाल के लिए कांग्रेस का नियंत्रण तय करेगा। अदालत में दाखिल डाक सेवा के एक अधिकारी के बयान के अनुसार गुरुवार को संघीय पोर्टल में सुधार जारी थे और अगले सप्ताह इसे स्वैच्छिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की उम्मीद थी। तलवानी लंबी अवधि की रोक पर भी विचार कर रही हैं, इसलिए चुनाव प्रशासक तैयारी कर रहे हैं जबकि जिला अदालत और सुप्रीम कोर्ट अपने अगले कदमों पर निर्णय करेंगे।

स्रोत: Reuters, Associated Press, CBS News, Supreme Court of the United States filing

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