अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 25 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को मतदाताओं की नागरिकता जांचने वाली विस्तारित संघीय प्रणाली फिर चलाने की अस्थायी अनुमति दी। अदालत ने उस निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाई जिसने संशोधित SAVE प्रणाली को बंद किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अपील की सुनवाई के दौरान राज्य मतदाता सूचियों की जांच के लिए इसका दोबारा उपयोग कर सकते हैं।
गृह सुरक्षा विभाग ने 2025 में SAVE का विस्तार किया था। इससे पहले ट्रंप ने संघीय एजेंसियों को राज्यों और स्थानीय अधिकारियों की मदद करने का निर्देश दिया था, ताकि पहले से पंजीकृत और पंजीकरण कराने वाले लोगों की नागरिकता जांची जा सके। नई प्रणाली सामाजिक सुरक्षा प्रशासन के रिकॉर्ड से जुड़ती है और एक साथ कई नाम खोज सकती है। न्यायाधीशों के अनुसार, पुरानी प्रणाली मुख्यतः सरकारी लाभों के लिए आव्रजन रिकॉर्ड जांचती थी।
अदालत के बहुमत ने कहा कि संघीय आव्रजन कानून विवादित सूचना साझाकरण की संभवतः अनुमति देता है, हालांकि याचिकाकर्ताओं ने गोपनीयता और सामाजिक सुरक्षा कानूनों का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 22 जून के उस जिला अदालत के आदेश को स्थगित किया जिसने संशोधित प्रणाली को रद्द किया था। तीन न्यायाधीशों ने असहमति जताई और मुख्य मुकदमा तथा अपील अभी लंबित हैं।
लीग ऑफ वीमेन वोटर्स, इलेक्ट्रॉनिक प्राइवेसी इन्फॉर्मेशन सेंटर और कुछ मतदाताओं ने बदलावों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि गलत नागरिकता रिकॉर्ड के कारण पात्र मतदाता, खासकर बाद में नागरिकता पाने वाले लोग, गलती से गैरनागरिक बताए जा सकते हैं। अदालत ने स्वीकार किया कि एक याचिकाकर्ता का सामाजिक सुरक्षा रिकॉर्ड उसकी नागरिकता प्राप्ति नहीं दिखाता और उससे अतिरिक्त प्रमाण मांगा जा सकता है।
प्रशासन का कहना है कि SAVE राज्यों को मतदाता सूचियों में गैरनागरिकों की पहचान करने में मदद देता है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, इसका इस्तेमाल करना राज्यों की इच्छा पर निर्भर है। संघीय नियम चुनाव से कुछ समय पहले मतदाता सूचियों से व्यवस्थित ढंग से नाम हटाने को भी सीमित करते हैं। इसलिए इस आदेश से राज्यों को अपनी प्रक्रिया बदलनी ही होगी या पूरे देश में तुरंत नाम हटेंगे, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकलता।
नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनाव से पहले यह फैसला आया है, जब मतदान पात्रता और व्यक्तिगत रिकॉर्ड तक संघीय पहुंच पर बहस चल रही है। अपील अदालत मूल विवाद पर विचार जारी रखेगी। सुप्रीम कोर्ट की रोक उसके आदेश में बताई गई शर्तों के अनुसार उस प्रक्रिया के दौरान लागू रहेगी। विस्तारित प्रणाली की अंतिम वैधता पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
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