विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को अफ्रीकी स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक चिकित्सा को सुरक्षित रूप से शामिल करने के लिए अधिक शोध, विनियमन और निवेश का आह्वान किया। 31 अगस्त को 24वें अफ्रीकी पारंपरिक चिकित्सा दिवस पर जारी इस अपील ने प्रमाण आधारित पारंपरिक देखभाल को पूरे महाद्वीप में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज बढ़ाने के प्रयासों से जोड़ा।
डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र और अफ्रीका क्षेत्रीय कार्यालय ने शोधकर्ताओं, पारंपरिक चिकित्सकों और समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा आयोजित की। प्रतिभागियों ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा एक जीवित ज्ञान प्रणाली है और प्राथमिक देखभाल में सहायता कर सकती है, बशर्ते अधिकारी उपचारों की जांच करें, उत्पादों तथा प्रक्रियाओं की निगरानी करें और जिम्मेदार विकास में निवेश करें।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, विशेषकर ग्रामीण समुदायों में पारंपरिक चिकित्सक अक्सर स्वास्थ्य देखभाल का पहला संपर्क होते हैं। संगठन के क्षेत्रीय विवरण में कहा गया है कि अफ्रीका के 70 से 80 प्रतिशत लोगों ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के रूप में पारंपरिक चिकित्सा के किसी रूप का उपयोग किया है, जबकि एक तिहाई आबादी को आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ये आंकड़े संभावित भूमिका और सुरक्षा उपायों की जरूरत दोनों दिखाते हैं।
वक्ताओं ने शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, उद्यमियों, समुदायों और चिकित्सकों के बीच निकट सहयोग तथा शोध और विकास के लिए अधिक घरेलू धन की मांग की। उन्होंने पीढ़ियों के बीच प्रेषित ज्ञान को लिखित रूप देने पर भी जोर दिया, ताकि उसे संरक्षित किया जा सके, उसका अध्ययन हो और बिना प्रमाण स्वीकार करने के बजाय उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जा सके।
यह दृष्टिकोण विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अपनाई गई 2025-2034 की डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति के अनुरूप है। इसकी चार प्राथमिकताएं प्रमाण मजबूत करना, विनियमन से सुरक्षा सुनिश्चित करना, उपयुक्त प्रथाओं को स्वास्थ्य प्रणालियों में जोड़ना और उनके सामाजिक तथा आर्थिक मूल्य का जिम्मेदार उपयोग करना हैं। संगठन ने इसे जैव चिकित्सा का पूरक बताया है, प्रमाणित चिकित्सकीय देखभाल का विकल्प नहीं।
कैमरून, मेडागास्कर, मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे में आयोजन की योजना बनाई गई। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि प्रगति के लिए रोगियों की रक्षा करते हुए चिकित्सकों को सशक्त बनाना, जैव विविधता बचाना और विश्वसनीय शोध को सुलभ सेवाओं में बदलना जरूरी होगा। अब देशों को वैश्विक रणनीति को राष्ट्रीय नियमों, निवेश निर्णयों और निगरानी वाले स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बदलना होगा।
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