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आकाशगंगाओं के बाहर गैस में ब्लैक होल के जेट की छाप मिली

प्रकाशित 27 सितंबर 2026 10 दृश्य

खगोलविदों को आकाशगंगाओं के दिखाई देने वाले किनारों से बहुत दूर मौजूद गैस में विशाल ब्लैक होल से निकले शक्तिशाली जेट की दिशा से जुड़ा संकेत मिला है। 26 सितंबर को प्रकाशित एक विज्ञान रिपोर्ट के अनुसार यह संकेत आकाशगंगाओं को घेरे विशाल गैस भंडार में चमकते हाइड्रोजन से जुड़ा है। इससे पता चलता है कि किसी आकाशगंगा के केंद्र की गतिविधि उसके बाहरी वातावरण तक असर पहुंचा सकती है।

अध्ययन दल में भारत के रमन अनुसंधान संस्थान की नम्रता रॉय और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी की संचयीता बोर्थाकुर शामिल हैं। अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में छपा है, जबकि विश्वविद्यालय ने 24 सितंबर को पहली बार उसके निष्कर्ष जारी किए थे। आकाशगंगा के चारों ओर फैली गैस ठंडी होकर भीतर जा सकती है और नए तारों के बनने के लिए सामग्री दे सकती है।

विश्वविद्यालय के अनुसार वैज्ञानिकों ने डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट के दृश्य प्रकाश संबंधी आंकड़ों को लोफार टू-मीटर स्काई सर्वे के रेडियो माप से जोड़ा। उन्होंने सक्रिय जेट वाली सैकड़ों आकाशगंगाओं के कमजोर संकेत एक साथ रखे और जेट की दिशा में आयनित हाइड्रोजन की एच-अल्फा चमक की जांच की।

सभी दिशाओं का औसत लेने पर हाइड्रोजन का संकेत कमजोर था, लेकिन जेट की धुरी के साथ वह स्पष्ट दिखाई दिया। विश्वविद्यालय ने बताया कि चमक दिखाई देने वाली आकाशगंगा के पास और फिर बाहरी गैस भंडार की सीमा के पास अधिक थी। मैग्नीशियम अवशोषण से की गई अलग जांच में अपेक्षाकृत ठंडी गैस अधिक समान रूप से फैली मिली और उसका जेट की दिशा से वैसा संबंध नहीं था।

शोधकर्ताओं और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार यह स्वरूप उस विचार का समर्थन करता है कि जेट उस गैस को गर्म या अस्त-व्यस्त करते हैं जो अन्यथा नए तारों को सामग्री दे सकती थी। अवलोकन बताते हैं कि जेट और गैस कहां मिलते हैं; वे यह सीधे नहीं मापते कि इसके कारण कितने तारे नहीं बने। आकाशगंगाओं की वृद्धि पर ब्लैक होल का प्रभाव समझने में यह अंतर आवश्यक है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक जेट की दिशा पर केंद्रित यह तरीका आगे के दृश्य प्रकाश और रेडियो सर्वेक्षणों में दूसरी आकाशगंगाओं पर भी परखा जा सकेगा। नए अवलोकन और कंप्यूटर अनुकरण यह स्पष्ट करेंगे कि जेट कितनी ऊर्जा गैस में छोड़ते हैं और क्या प्रभावित गैस लंबे समय तक ठंडी नहीं हो पाती।

स्रोत: Arizona State University (September 24, 2026); Phys.org (September 26, 2026); India Department of Science and Technology; The Astrophysical Journal Letters, DOI 10.3847/2041-8213/ae9cbd

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