होम पर वापस जाएं एक अरब परमाणुओं के सिमुलेशन से संलयन रिएक्टरों में टंगस्टन क्षति का अधिक जोखिम सामने आया विज्ञान

एक अरब परमाणुओं के सिमुलेशन से संलयन रिएक्टरों में टंगस्टन क्षति का अधिक जोखिम सामने आया

प्रकाशित 15 अगस्त 2026 0 दृश्य

हेलसिंकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने असाधारण रूप से बड़े कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए पाया है कि भविष्य के संलयन रिएक्टरों में प्लाज्मा के सामने वाली दीवारों के प्रमुख उम्मीदवार टंगस्टन को रिएक्टर से जुड़ी ऊर्जाओं पर स्थापित मॉडलों के अनुमान से अधिक प्राथमिक विकिरण क्षति हो सकती है। Phys.org ने यह निष्कर्ष 15 अगस्त को प्रकाशित किया और शोध को Physical Review Letters ने स्वीकार किया है। इससे संलयन न्यूट्रॉनों के संपर्क में आने वाले पुर्जों की टिकाऊ अवधि के इंजीनियरिंग आकलन प्रभावित हो सकते हैं।

संलयन अभिक्रियाएं उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन छोड़ती हैं, जो टंगस्टन के किसी परमाणु से टकराकर उसे क्रिस्टल जाल में अपनी जगह से हटा सकते हैं। पीछे धकेला गया परमाणु अन्य परमाणुओं से टकराकर टक्करों की श्रृंखला बना सकता है और धातु में दोष छोड़ सकता है। क्षति के इन शुरुआती क्षणों का मापन महत्वपूर्ण है, क्योंकि टंगस्टन को अत्यधिक गर्म और विद्युत आवेशित प्लाज्मा के आसपास के कठोर वातावरण में अपनी संरचनात्मक क्षमता बनाए रखनी होती है।

प्रथम लेखक जेस्पर बिगमेस्टर की अगुवाई वाली टीम ने मशीन लर्निंग से संचालित आणविक गतिकी का इस्तेमाल किया, जिसे ग्राफिक्स प्रोसेसर पर कुशलतापूर्वक चलाने के लिए ढाला गया था। गणनाओं ने 2 मेगाइलेक्ट्रॉनवोल्ट तक की प्रतिक्षेप ऊर्जा और अधिकतम एक अरब परमाणुओं वाले तंत्रों का अनुसरण किया। शोधपत्र के अनुसार पहले के पूर्ण परमाणु-स्तरीय अध्ययन आम तौर पर कुछ सौ किलोइलेक्ट्रॉनवोल्ट पर रुक जाते थे, जिससे विकिरण प्रयोगों में नियमित रूप से प्राप्त कहीं अधिक ऊर्जाओं तक एक अंतर बना रहता था।

इस विस्तृत दायरे में वैज्ञानिकों ने प्राथमिक क्षति उत्पादन की चार अवस्थाएं पहचानीं। मौजूदा विवरण सामान्यतः मानते हैं कि प्रतिक्षेप ऊर्जा बढ़ने पर दोषों की संख्या पहले उप-रेखीय और फिर रेखीय ढंग से बढ़ती है। नई गणनाओं ने इसके विपरीत उच्च ऊर्जा पर एक अतिरिक्त व्यवहार दिखाया, जो पुराने मॉडलों से अलग है। इसका परिवर्तन लगभग 300 किलोइलेक्ट्रॉनवोल्ट पर शुरू होता है, जो संलयन से निकले न्यूट्रॉन द्वारा टंगस्टन परमाणु को दी जा सकने वाली अधिकतम ऊर्जा है।

सिमुलेशन इस प्रकार संकेत देते हैं कि संलयन के अनुरूप प्रतिक्षेप ऊर्जा के पास टंगस्टन के पुर्जे पुराने अनुमानों से अधिक बिगड़ सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि टंगस्टन अनुपयुक्त है और न ही अध्ययन चालू रिएक्टर का जीवनकाल मापता है। यह एक परमाणु के प्रतिक्षेप से पैदा शुरुआती दोषों का संशोधित मॉडल देता है, जिसे शोधकर्ता जमा होने वाली क्षति और पुर्जों की सेवा अवधि का पूर्वानुमान लगाने वाली लंबे समय के पैमाने की गणनाओं में शामिल कर सकते हैं।

हेलसिंकी समूह इस विधि को अधिक विकिरण मात्रा, बड़े स्थानिक पैमानों और अधिक सटीक सिमुलेशन तक ले जाने की योजना बना रहा है। वह यह भी जांचेगा कि कणों का आकार, उनकी सीमाएं और मिश्रधातु तत्व नतीजे को कैसे बदलते हैं। किसी विशेष रिएक्टर डिजाइन में निष्कर्ष लागू करने से पहले प्रयोगात्मक तुलना और बहु-पैमाना अध्ययन जरूरी होंगे, लेकिन एक अरब परमाणुओं की गणना अधिक टिकाऊ दीवारों की जांच के लिए नया आधार देती है।

स्रोत: Phys.org, Physical Review Letters, arXiv

टिप्पणियाँ