यूरोपीय अंतरिक्ष यान जूस सोमवार, 28 सितंबर को पृथ्वी के पास से गुजर रहा था और इसी दौरान स्वीडन में बने एक सेंसर ने अंतरिक्ष में अपना पहला पूर्ण वैज्ञानिक अवलोकन शुरू किया। स्वीडिश इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस फिजिक्स ने बताया कि उसके जोवियन न्यूट्रल्स एनालाइजर, जेएनए, को तीन वर्ष की नियोजित निष्क्रियता के बाद पूरी शक्ति से चालू किया गया। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने हिंद महासागर के ऊपर लगभग 8,640 किलोमीटर की ऊंचाई पर निकटतम पहुंच का समय 11:45 यूटीसी निर्धारित किया था।
जूस का पूरा नाम जुपिटर आइसी मून्स एक्सप्लोरर है। इसे अप्रैल 2023 में बृहस्पति तक आठ वर्ष की यात्रा के लिए प्रक्षेपित किया गया था। एजेंसी के अनुसार मिशन ग्रह और उसके महासागर वाले चंद्रमाओं गैनीमीड, यूरोपा और कैलिस्टो का अध्ययन करेगा। इसका रास्ता चंद्रमा, शुक्र और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग कर दिशा और गति बदलता है, जिससे बृहस्पति के पास काम करने के लिए ईंधन बचता है। यान 2024 में चंद्रमा और पृथ्वी तथा 2025 में शुक्र के पास से गुजर चुका है।
एजेंसी का अनुमान था कि सोमवार की गुरुत्वाकर्षण सहायता जूस का रास्ता लगभग 20 डिग्री मोड़ेगी और उसकी गति करीब 3.5 किलोमीटर प्रति सेकंड बढ़ाएगी। पास आते समय यान कुछ अवधि तक पृथ्वी की छाया में रहा और उसे बैटरी की ऊर्जा पर निर्भर रहना पड़ा, इसलिए नियंत्रकों ने कुछ वैज्ञानिक गतिविधियों को प्राथमिकता दी। एजेंसी ने पहले छोटे मार्ग सुधारों के अवसर भी तय किए थे। इन योजनाओं से अपने आप इस उड़ान के अंतिम परिणाम की पुष्टि नहीं होती।
संस्थान के अनुसार किरुना में विकसित जेएनए ऊर्जावान तटस्थ परमाणुओं का पता लगाता है, जिनसे किसी ग्रह के आसपास के अंतरिक्ष वातावरण को दूर से समझा जा सकता है। इंजीनियरों ने इसे अधिकतर बंद रखा ताकि इसकी सामग्री में फंसी गैसें निकल सकें और उच्च वोल्टेज चालू होने पर विद्युत विसर्जन का खतरा घटे। जुलाई में जर्मनी के डार्मश्टाट स्थित एजेंसी के नियंत्रण केंद्र में टीम ने 20 घंटों में धीरे धीरे वोल्टेज बढ़ाया। पृथ्वी के पास से गुजरना सेंसर को अंतरिक्ष में प्राकृतिक संकेत मापने का पहला अवसर देता है।
संस्थान को उम्मीद है कि जेएनए पृथ्वी के वायुमंडल के सबसे बाहरी हिस्सों और आसपास के अंतरिक्ष को देखेगा। एजेंसी ने कहा कि जूस के दस वैज्ञानिक उपकरण 23 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच पृथ्वी और चंद्रमा से आंकड़े जुटाएंगे, ताकि बृहस्पति के लिए उपकरणों और विश्लेषण पद्धतियों को परखा जा सके। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की लंबी पूंछ में माप लेने और प्रकाशीय दिशा निर्धारण जांचने के लिए चंद्र क्षितिज की तस्वीरें लेने की भी योजना है। इन गतिविधियों के वैज्ञानिक नतीजों का मूल्यांकन अभी बाकी है।
एजेंसी जनवरी 2029 में पृथ्वी के पास से एक और उड़ान की योजना बना रही है। इसके बाद जूस जुलाई 2031 में बृहस्पति पहुंचेगा और ग्रह के वातावरण तथा उसके बर्फीले चंद्रमाओं का अध्ययन करेगा। गैनीमीड की कक्षा में पहुंचने की योजना 2034 की है। शोधकर्ता वर्तमान उड़ान के मापों का विश्लेषण कर नए चालू हुए सेंसर का प्रदर्शन जांचेंगे, ताकि बृहस्पति पर उसके मुख्य काम की तैयारी हो सके।
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