नासा ने 25 सितंबर को बताया कि उसका नील गेहरल्स स्विफ्ट अंतरिक्ष वेधशाला फिर से अपने तीनों वैज्ञानिक उपकरण चला रहा है और अचानक दिखने वाले गामा किरण विस्फोटों की ओर अपने आप मुड़ सकता है। बहाल हुई इस क्षमता से बर्स्ट अलर्ट टेलीस्कोप किसी घटना को पहचानता है और उसके बाद दूसरे उपकरण पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश तथा एक्स किरणों में उसका तुरंत अध्ययन करते हैं। हालांकि एजेंसी ने चेताया कि उपग्रह की ऊंचाई लगातार घट रही है और वैज्ञानिक निरीक्षण अक्टूबर की शुरुआत से मध्य के बीच रुक सकते हैं।
एक समय में आकाश का लगभग 16 प्रतिशत भाग देखने वाला बर्स्ट अलर्ट टेलीस्कोप ऊर्जा बचाने के लिए अप्रैल में बंद किया गया था। इससे नियंत्रक स्विफ्ट के सौर पैनलों को ऐसी दिशा में रख पाए जिससे वायुमंडलीय घर्षण कम हो, जबकि एक वाणिज्यिक यान उसकी कक्षा ऊंची करने की तैयारी कर रहा था। सेवा यान में समस्याएं आने पर नासा ने उस मिशन का दायरा घटा दिया। एजेंसी के अनुसार पराबैंगनी और एक्स किरण दूरबीनों ने अगस्त में फिर आंकड़े जुटाने शुरू कर दिए थे।
नासा ने कहा कि टीम ने 18 सितंबर को पुष्टि की कि गामा किरण उपकरण का अंशांकन पूरा है और वह विकिरण पकड़ रहा है। नियंत्रकों ने 21 सितंबर को स्वचालित दिशा बदलने की सुविधा बहाल की। विस्फोट का पता लगने पर स्विफ्ट यूनिवर्सिटी पार्क स्थित पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी से भेजी गई निरीक्षण योजना रोककर अपनी अन्य दो दूरबीनें उस घटना की ओर मोड़ सकता है। क्षणिक और अत्यधिक ऊर्जा वाली अंतरिक्ष घटनाओं के अध्ययन के लिए यह तेज प्रतिक्रिया जरूरी है।
यह बहाली उपग्रह का गिरना धीमा करने के लिए महीनों तक लगाए गए प्रतिबंधों के बाद हुई है। दिसंबर 2025 से वैज्ञानिक दल ने तय किए गए लगभग एक चौथाई लक्ष्यों की जगह कम घर्षण वाली दिशाएं चुनीं। फरवरी तक यह तरीका सभी लक्ष्यों पर लागू था और विस्फोटों पर स्वचालित प्रतिक्रिया बंद थी। नासा के नवीनतम विवरण के अनुसार स्विफ्ट अभी पृथ्वी से लगभग 325 किलोमीटर ऊपर है और सामान्य वैज्ञानिक काम शुरू होने से फिर तेजी से नीचे जा रहा है।
नासा के अनुसार लगभग 300 किलोमीटर की ऊंचाई के नीचे संचालन कठिन होता है और वैज्ञानिक निरीक्षण संभवतः बंद हो जाएंगे। उसका मौजूदा अनुमान है कि स्विफ्ट अक्टूबर की शुरुआत से मध्य तक इस सीमा पर पहुंच जाएगा। इसलिए बहाल चेतावनी प्रणाली खगोलविदों को नए विस्फोट दर्ज करने के लिए सीमित समय देती है, जबकि मिशन नियंत्रक कक्षा पर निगरानी बनाए रखेंगे।
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