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रक्त संकेतक ने जीवित लोगों में सीटीई पहचानने की शुरुआती संभावना दिखाई

प्रकाशित 1 अगस्त 2026 551 दृश्य

अल्जाइमर रोग के लिए विकसित रक्त का एक प्रोटीन संकेतक जीवित लोगों में क्रॉनिक ट्रॉमैटिक एन्सेफैलोपैथी यानी सीटीई की पहचान में भी मदद कर सकता है। साइंस न्यूज ने 31 जुलाई को प्रकाशित प्रारंभिक शोध में बताया कि मृत्यु के बाद पुष्ट सीटीई की गंभीरता बढ़ने के साथ eMTBR-tau243 का स्तर भी बढ़ा। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह छोटा अध्ययन अभी नैदानिक परीक्षण नहीं है।

सीटीई मस्तिष्क की बढ़ती हुई बीमारी है जिसका संबंध सिर पर बार-बार लगने वाले आघात से है, जिसमें संपर्क वाले खेलों का जोखिम भी शामिल है। डॉक्टर अभी केवल मृत्यु के बाद मस्तिष्क के ऊतक की जांच करके इसकी पुष्टि कर सकते हैं, इसलिए जीवनकाल में उपयोग के लिए कोई प्रमाणित जैविक परीक्षण नहीं है। बीमारी में टाउ नामक प्रोटीन के असामान्य जमाव बनते हैं; सामान्य स्थिति में टाउ तंत्रिका कोशिकाओं को सहारा देता और उनके भीतर सामग्री पहुंचाने में मदद करता है।

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के तंत्रिका वैज्ञानिक कांता होरी और चिहिरो सातो ने अल्जाइमर जांच विकसित करते समय पहले eMTBR-tau243 का मूल्यांकन किया। आठ मस्तिष्क रोगों वाले 112 लोगों के मस्तिष्क-मेरु द्रव में बढ़ा स्तर मुख्यतः अल्जाइमर मामलों में मिला, लेकिन उन्नत सीटीई वाला एक अप्रत्याशित रोगी अपवाद था। इस अवलोकन के बाद टीम ने उन नमूनों का अध्ययन किया जो पुष्टि की गई विकृति वाले दान किए गए मस्तिष्कों से जुड़े थे।

शोधकर्ताओं ने उन 11 दाताओं के रक्त की जांच की जिनके मस्तिष्कों में सीटीई मिला था। स्वस्थ नियंत्रण समूह की तुलना में संकेतक अधिक था और रोग के चरण के साथ बढ़ा; चरण एक के मामलों में स्तर चरण चार से काफी कम था। चरण तीन के केवल दो मस्तिष्क उपलब्ध थे और उनके परिणाम ने सिर्फ बीच के स्तर का रुझान दिखाया। सीटीई विश्लेषण की सहकर्मी समीक्षा नहीं हुई है और इसे 15 जुलाई को लंदन में अल्जाइमर एसोसिएशन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया था।

यह निष्कर्ष महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि जीवित व्यक्ति के लिए भरोसेमंद जांच लक्षणों को समझने और उपचार परीक्षणों के लिए उचित प्रतिभागी चुनने में मदद करेगी। फिर भी शोधकर्ताओं ने कहा कि बहुत बड़े आंकड़ा समूह में पुष्टि अनिवार्य है। जांच विकसित करने वाले वैज्ञानिकों में से एक ईसाई कंपनी में काम करता है, जो eMTBR-tau243 को लक्ष्य बनाने वाले उपचार विकसित कर रही है; शुरुआती नतीजों की व्याख्या में यह संबंध प्रासंगिक है।

नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अलग सहकर्मी-समीक्षित कार्य ने दिखाया है कि प्लाज्मा संकेतक अल्जाइमर के टाउ जमाव को दर्शाता है। वहीं 2026 के एक अन्य अध्ययन में केवल नैदानिक लक्षण सूचियों और मृत्यु के बाद मिले सीटीई के बीच कमजोर मेल पाया गया। इसलिए उपलब्ध प्रमाण नियमित जांच नहीं, बल्कि आगे संकेतक अनुसंधान का समर्थन करते हैं। अगले कदम स्वतंत्र पुनरावृत्ति, बड़े और विविध समूह तथा यह जांचना हैं कि जीवित रोगियों में माप सीटीई को टाउ से जुड़ी दूसरी बीमारियों से अलग कर सकता है या नहीं।

स्रोत: Science News, Alzheimer's Association International Conference, Nature Medicine, Washington University School of Medicine

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