इंग्लैंड की एमिली कैंपबेल ने गुरुवार को ग्लासगो के एसईसी आर्माडिलो में महिलाओं की 86 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग की प्रतियोगिता जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों का अपना सुपर हैवीवेट खिताब सफलतापूर्वक बचाया। इस जीत से दो बार की ओलंपिक पदक विजेता ने लगातार दूसरा राष्ट्रमंडल स्वर्ण हासिल किया और 2026 खेलों में भारोत्तोलन का पांच दिवसीय कार्यक्रम पूरा हुआ।
कैंपबेल ने बर्मिंघम 2022 में राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड के साथ इसी के बराबर 87 किलोग्राम से अधिक वर्ग का खिताब जीता था, इसलिए वह फाइनल में स्पष्ट दावेदार के रूप में उतरीं। टीम इंग्लैंड और अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ ने 32 वर्षीय खिलाड़ी को ग्लासगो प्रतियोगिता की प्रमुख हस्तियों में रखा था, जहां संशोधित अंतरराष्ट्रीय भार वर्ग के कारण उन्होंने 86 किलोग्राम से अधिक श्रेणी में भाग लिया।
नॉटिंघम में जन्मी भारोत्तोलक ने मेजबान देश के दर्शकों के सामने नियंत्रित प्रदर्शन किया और अपने सर्वश्रेष्ठ स्नैच तथा सर्वश्रेष्ठ क्लीन एंड जर्क के संयुक्त कुल से खिताब सुनिश्चित किया। मलेशिया की सिटी अकीला फरहाना द्रामान ने रजत पदक जीता और खेलों में अपने देश के मजबूत भारोत्तोलन अभियान को आगे बढ़ाया। आयोजकों के परिणामों ने अंतिम तालिका में कैंपबेल को शीर्ष पर दर्ज किया।
यह परिणाम उस उपलब्धि सूची में जुड़ गया जिसमें टोक्यो 2020 का ओलंपिक रजत, पेरिस 2024 का ओलंपिक कांस्य और छह यूरोपीय खिताब पहले से शामिल हैं। टोक्यो के पदक ने उन्हें ओलंपिक भारोत्तोलन पदक जीतने वाली पहली ब्रिटिश महिला बनाया था। उनका नवीनतम यूरोपीय खिताब अप्रैल 2026 में बातुमी में इसी 86 किलोग्राम से अधिक वर्ग में आया था।
इस स्वर्ण का अतिरिक्त महत्व था क्योंकि कैंपबेल ग्लासगो 2026 की आधिकारिक खिलाड़ी दूत भी थीं। उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य जीता था और चार साल बाद स्वर्ण हासिल किया। वह टीम इंग्लैंड की सबसे अनुभवी प्रतियोगियों में से एक के रूप में स्कॉटलैंड पहुंचीं और सफल खिताबी बचाव से बर्मिंघम के बाद राष्ट्रमंडल प्रतियोगिता में अपना अजेय क्रम कायम रखा।
एसईसी आर्माडिलो में 26 जुलाई से आयोजित सोलह पदक स्पर्धाओं के बाद भारोत्तोलन 30 जुलाई को समाप्त हुआ। अब खेलों का ध्यान 2 अगस्त के समापन कार्यक्रम से पहले बची हुई एथलेटिक्स, साइकिलिंग, मुक्केबाजी, जूडो, बोल्स और नेटबॉल प्रतियोगिताओं पर जाएगा, जबकि कैंपबेल का परिणाम अंतिम सप्ताह में इंग्लैंड की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहेगा।
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