होम पर वापस जाएं गर्मी में कुछ शहरी वृक्ष प्रजातियां ओजोन प्रदूषण बढ़ा सकती हैं विज्ञान

गर्मी में कुछ शहरी वृक्ष प्रजातियां ओजोन प्रदूषण बढ़ा सकती हैं

प्रकाशित 21 अगस्त 2026 0 दृश्य

अधिक मात्रा में आइसोप्रीन छोड़ने वाले शहरी पेड़ गर्म मौसम में ओजोन बनाने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं में अनुपात से कहीं बड़ा योगदान दे सकते हैं। साइंस एडवांसेज में प्रकाशित और नेचर द्वारा 20 अगस्त को प्रस्तुत अध्ययन के अनुसार, बीजिंग में मई से जुलाई 2021 के बीच वनस्पति कुल वाष्पशील कार्बनिक यौगिक उत्सर्जन का लगभग 10 प्रतिशत स्रोत थी, लेकिन ओजोन निर्माण की ओर ले जाने वाली मापी गई रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता में उसका हिस्सा 52 प्रतिशत था।

धरातल के पास ओजोन सूर्य के प्रकाश से संचालित उन प्रतिक्रियाओं से बनता है जिनमें वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और मुख्यतः यातायात तथा उद्योग से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड शामिल होते हैं। ऊपरी वायुमंडल के सुरक्षात्मक ओजोन के विपरीत, धरातलीय ओजोन श्वसन मार्गों में सूजन या नुकसान कर सकता है और दमा अथवा फेफड़े की बीमारी वाले लोगों के लिए विशेष कठिनाई पैदा कर सकता है। पेड़ छाया, ठंडक, कार्बन भंडारण और प्रदूषक हटाने के लाभ भी देते हैं, इसलिए निष्कर्ष शहरी हरियाली के विरोध में नहीं बल्कि प्रजातियों के सावधान चयन के पक्ष में है।

दल ने बीजिंग के विभिन्न हिस्सों से हवा के नमूने लिए, उन्हें ओजोन निगरानी केंद्रों के आंकड़ों से जोड़ा और आकलन किया कि अलग यौगिक हाइड्रॉक्सिल रेडिकल के साथ कितनी तेजी से प्रतिक्रिया करते हैं। इन प्रतिक्रियाओं से पेरॉक्सिल रेडिकल बनते हैं, जो नाइट्रोजन ऑक्साइड से प्रतिक्रिया कर सूर्य के प्रकाश में अंततः ओजोन बनने में सहायता करते हैं। प्रकाश संश्लेषण के दौरान विलो और पॉपलर जैसी प्रजातियों से निकलने वाला अत्यधिक प्रतिक्रियाशील आइसोप्रीन वनस्पति योगदान में प्रमुख था, हालांकि मानव गतिविधियों ने कुल मिलाकर अधिक वाष्पशील यौगिक छोड़े।

बीजिंग के लगभग 35 प्रतिशत पेड़ों को आइसोप्रीन उत्सर्जक माना गया। शोधकर्ताओं ने इसके बाद 24 विशाल शहरों में लगाई गई प्रजातियों का अध्ययन किया और पाया कि सिडनी तथा मेलबर्न समेत कई शहरों में संभावित उत्सर्जन बीजिंग से अधिक हो सकता है। नेचर के अनुसार सिडनी के करीब 65 प्रतिशत पेड़ यह यौगिक छोड़ते हैं। इससे संकेत मिलता है कि स्थानीय रोपण फैसले वायु रसायन को प्रभावित करते हैं, हालांकि वास्तविक ओजोन स्तर नाइट्रोजन ऑक्साइड, धूप और मौसम पर भी निर्भर करता है।

गर्मी ने प्रभाव को काफी मजबूत किया। तापमान 20 से 35 डिग्री सेल्सियस होने पर वनस्पति यौगिकों से जुड़ी हाइड्रॉक्सिल प्रतिक्रियाशीलता सात गुना बढ़ी, जबकि कुल प्रतिक्रियाशीलता में वनस्पति का हिस्सा 21 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत हो गया। इसका अर्थ है कि वैश्विक तापवृद्धि और अधिक बार आने वाली गर्म लहरें वायु गुणवत्ता की इस चुनौती को बढ़ा सकती हैं, ठीक उसी समय जब शहर खतरनाक गर्मी घटाने के लिए वृक्ष आवरण बढ़ा रहे हैं।

इंसब्रुक विश्वविद्यालय ने कहा कि सामान्य नवीनीकरण के दौरान बीजिंग के अधिक उत्सर्जन वाले दसवें हिस्से पेड़ों को कम उत्सर्जन वाली प्रजातियों से बदलने पर आइसोप्रीन कम से कम 29 प्रतिशत घट सकता है। वैज्ञानिक बड़े पैमाने पर पेड़ काटने की सलाह नहीं देते। क्रमिक बदलाव, विविध रोपण और नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा मानव-निर्मित वाष्पशील पदार्थों में लगातार कमी अधिक संतुलित उपाय हैं। अलग जलवायु वाले क्षेत्रों में आगे के मापन से प्रत्येक शहर के लिए उपयुक्त रोपण और प्रदूषण नीति बन सकेगी।

स्रोत: Science Advances, Nature, University of Innsbruck

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